चापाकल से चुनावी खर्च तक... झामुमो नेता धीरज दुबे ने विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी को घेरा

झामुमो नेता धीरज दुबे ने गढ़वा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने विधायक पर झूठ बोलने, जनता को ठगने और जनहित के मुद्दों पर ध्यान न देने का आरोप लगाया है.

गढ़वा. झामुमो के मीडिया पैनलिस्ट सह केंद्रीय सदस्य धीरज दुबे ने गढ़वा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने विधायक पर झूठ बोलने, जनता को ठगने और गाली-गलौज करने का आरोप लगाया. धीरज ने कहा कि विधायक जनहित के मुद्दों के बजाय व्यक्तिगत टिप्पणी और विपक्षी कार्यकर्ताओं के निजी मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं.

81 चापाकलों पर उठाये सवाल

धीरज दुबे ने पिछले वर्ष लगाये गये 81 चापाकलों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इनमें 24 अकेले उड़सूगी पंचायत में लगाये गये. उन्होंने जरूरतमंदों के बजाय संपन्न लोगों को कथित रूप से 10 हजार रुपये लेकर चापाकल देने का आरोप लगाया. कई जगह निर्धारित 210 फीट के बजाय 60-70 फीट बोरिंग कराने का भी आरोप लगाया. उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की.

50 हजार बनाम 37,51,939 रुपये का मुद्दा

धीरज ने विधायक के चुनावी खर्च पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि विधायक इसे 50 हजार रुपये बताते हैं, जबकि हलफनामे में 37,51,939 रुपये दर्ज हैं.

उन्होंने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, सिंचाई, बिजली और खराब ट्रांसफॉर्मरों के मुद्दे पर भी विधायक को घेरा.

बालू मामले में संरक्षण देने का आरोप

बालू मामले को लेकर भी धीरज दुबे ने विधायक पर संरक्षण देने का आरोप लगाया. उन्होंने महूलिया में बालू लदे ट्रैक्टर से दो लोगों की मौत का जिक्र किया.

धीरज ने कहा कि व्यक्तिगत और अमर्यादित टिप्पणी करने से जनता की समस्याएं हल नहीं होंगी. मौके पर शरीफ अंसारी, चंदन जायसवाल, चंदन पासवान सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे.

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By Avinash Singh

अविनाश कुमार सिंह प्रभात खबर के गढ़वा ब्यूरो चीफ हैं. वह आंचलिक से लेकर राज्य मुख्यालय तक 27 वर्ष से अधिक की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग, हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू और खोजी पत्रकारिता.में इन्हें महारत हासिल है. अविनाश कुमार सिंह झारखंड की पत्रकारिता और 'प्रभात खबर' के विश्वसनीय चेहरा हैं, जिन्होंने खबरों की गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता दी है. लगभग तीन दशकों (27 वर्ष) के अपने लंबे सफर में उन्होंने पलामू ब्यूरो प्रमुख के रूप में 10 साल से अधिक समय तक नेतृत्व किया. इसके बाद प्रदेश मुख्यालय (रांची) में काम करते हुए, विशेषकर वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान, उनके सटीक चुनावी विश्लेषण और राजनीतिक रिपोर्टिंग ने काफी प्रभाव छोड़ा.उनकी लेखनी का दायरा बेहद व्यापक है—संवेदनशील क्राइम रिपोर्टिंग से लेकर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के इंटरव्यू तक, उनकी हर खबर चर्चा में रही है. पत्रकारिता के माध्यम से कई बड़े मामलों का उद्भेदन करना उनकी विशेष पहचान है.झारखंड राज्य गठन के बाद अविनाश ने पलामू में काम करते हुये राजनीतिक से जुड़ी कई ऐसी खबर को ब्रेक किया ,जिसका असर राज्य की राजनीतिक पड़ा .प्रयोगधर्मी पत्रकार के रूप में भी इनकी पहचान है .संस्थान के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 'बेस्ट एम्प्लोयी' जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. प्रभात खबर के संघर्ष से लेकर इसके विकास और उत्थान के सफर में अविनाश एक सक्रिय सहभागी और सहयात्री रहे हैं.

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