रमना से दिनेश गुप्ता की रिपोर्ट
Garhwa Daughter Funeral Case, गढ़वा : झारखंड के गढ़वा जिले के रमना प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत बगोंधा टोला में शादी के दौरान दुल्हन ने जब शादी से इनकार कर दिया तो परिजनों ने ऐसा कदम उठाया जो गांव में चर्चा का विषय बन गया. दरअसल जब बेटी ने सिंदूरदान के वक्त विवाह करने सी मना कर दिया तो परिवार को लोगों ने जीवित बेटी की ही प्रतीकात्मक शव यात्रा (अर्थी) निकालकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया. इस अजीबो-गरीब ग्रामीण हैरान रह गए और आसपास के इलाके में कई तरह की चर्चाएं होनी शुरू हो गई.
जयमाला के बाद सिंदूरदान के वक्त अड़ गई दुल्हन
जानकारी के अनुसार, बगोंधा टोला निवासी सुखट राम की पुत्री पुष्पा कुमारी की शादी गढ़वा थाना क्षेत्र के जुबैरिया गांव निवासी दशरथ रवि उर्फ बसंत राम के पुत्र दीपक कुमार रवि के साथ तय हुई थी. निर्धारित तिथि पर बारात पूरे धूमधाम, उत्साह और गाजे-बाजे के साथ लड़की के गांव पहुंची थी. लड़की पक्ष लोगों ने भी दिल खोलकर बारातियों का शानदार स्वागत-सत्कार किया. जयमाला सहित विवाह की अधिकांश रस्में भी दोनों परिवारों की हंसी-खुशी के साथ पूरी हो चुकी थीं. लेकिन, खेल तब बिगड़ गया जब मंडप में सिंदूरदान की मुख्य रस्म की बारी आई. सिंदूरदान के ठीक पहले युवती ने अचानक शादी करने से साफ तौर पर मना कर दिया. दुल्हन के इस अप्रत्याशित और चौंकाने वाले फैसले से शादी समारोह में अचानक हड़कंप और अफरा-तफरी मच गई. स्थिति को बिगड़ता देख परिजनों, रिश्तेदारों, ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मिलकर युवती को मनाने और समझाने की रातभर बहुत कोशिश की. मामले की गंभीरता को देखते हुए सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची. पुलिस ने भी लड़की को काफी समझाया-बुझाया और उसके भविष्य का हवाला दिया, लेकिन वह अपने निर्णय पर पत्थर की तरह अडिग रही. अंततः थक-हारकर दूल्हे और उसके परिजनों को बिना दुल्हन के ही बारात लेकर वापस लौटना पड़ा.
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परिजनों ने बेटी को मृत मानकर की अंतिम संस्कार की रस्में
इस घटना के बाद से ही युवती के माता-पिता और पूरा परिवार गहरे सदमे, लोक-लाज और भारी आक्रोश में डूबा हुआ था. घटना के कुछ दिनों बाद परिजनों ने एक बेहद कड़ा और सबको हैरान करने वाला कदम उठाते हुए अपनी ही बेटी को हमेशा के लिए मृत मान लिया. उन्होंने बाकायदा अपनी जीवित बेटी की एक प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली. ग्रामीणों के अनुसार, परिजनों ने इस प्रतीकात्मक शव यात्रा (अर्थी) को पूरे गांव में घुमाया. इसके बाद श्मशान ले जाकर प्रतीकात्मक रूप से उसका अंतिम संस्कार कर दिया और मुखाग्नि की रस्में भी निभाईं. इस प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार के दौरान रोते-बिलखते परिजनों ने समाज के सामने यह स्पष्ट कर दिया कि युवती के इस आत्मघाती कदम से उनके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा और इज्जत को भारी ठेस पहुंची है, इसलिए अब उनका अपनी इस बेटी से जीवनभर के लिए कोई संबंध नहीं रहा. परिजनों का रो-रोकर कहना था कि बेटी की विदाई की पूरी तैयारियां कर ली गई थीं, जिसमें दोनों पक्षों के सैकड़ों मेहमान शामिल हुए थे. ऐसे अंतिम समय पर विवाह से इनकार किए जाने से परिवार को गहरी सामाजिक, मानसिक और भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ा है, जिसे वे कभी भूल नहीं पाएंगे. फिलहाल यह पूरी घटना पूरे गढ़वा जिले में कौतूहल और चर्चा का विषय बनी हुई है.
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