गढ़वा में मेदिनीनगर सदर अस्पताल के नाम पर बनता था फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, अब हुई कड़ी कार्रवाई

Garhwa Crime News: गढ़वा जिले के मेराल में प्रशासन ने छापेमारी कर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले 'विशाल ऑनलाइन सेंटर' को सील कर दिया है. मेदिनीनगर सदर अस्पताल के नाम पर व्हाट्सएप के जरिए 1400 रुपये लेकर जाली सर्टिफिकेट बनाए जा रहे थे. अब तक जारी 40 सर्टिफिकेट रद्द किए जाएंगे और केस दर्ज हो रहा है. पूरी रिपोर्ट पढ़ें.

Garhwa Crime News, गढ़वा (अविनाश कुमार की रिपोर्ट): गढ़वा जिला प्रशासन ने एक बड़ी और कड़क कार्रवाई करते हुए मेराल प्रखंड क्षेत्र के ओखरगाड़ा पचपेड़ी मोड़ स्थित ‘विशाल ऑनलाइन सेंटर’ को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है. यह कार्रवाई गढ़वा के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार के सीधे निर्देश पर जाली तरीके से जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले रैकेट के खिलाफ की गई है. इस औचक छापेमारी के दौरान मौके पर प्रभारी बीडीओ-सह-अंचल अधिकारी (सीओ) यशवंत नायक और मेराल थाना प्रभारी विष्णु कांत भारी पुलिस बल के साथ मुस्तैद रहे.

एसडीएम के दौरे में खुली पोल

मामले का खुलासा करते हुए सीओ यशवंत नायक ने बताया कि एसडीएम संजय कुमार के क्षेत्र भ्रमण के दौरान प्रशासन को इस फर्जी रैकेट के संबंध में एक पुख्ता गुप्त सूचना मिली थी. सूचना में कहा गया था कि पचपेड़ी मोड़ पर स्थित इस सेंटर पर ‘मेदिनीनगर सदर अस्पताल’ के नाम का इस्तेमाल कर जाली जन्म प्रमाण पत्र धड़ल्ले से तैयार किए जा रहे हैं और इसके एवज में आम जनता से मोटी रकम वसूली जा रही है. मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए त्वरित जांच टीम का गठन कर जब अचानक छापेमारी की गई, तो वहां चल रहा यह अवैध खेल रंगे हाथों पकड़ा गया.

व्हाट्सएप के जरिए मेदिनीनगर से जुड़ा था नेटवर्क

प्रशासनिक पूछताछ और जांच के दौरान ऑनलाइन सेंटर के संचालक विशाल कुमार (निवासी: गोंदा गांव) ने कई चौंकाने वाले राज उगले हैं. संचालक ने कबूल किया कि वह मेदिनीनगर (पलामू) के संतोष कुमार नामक व्यक्ति के साथ मिलकर इस सिंडिकेट को चला रहा था.

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इस फर्जीवाड़े का तरीका बेहद शातिराना था

संचालक ग्राहकों के आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्रों की फोटोकॉपी व्हाट्सएप के माध्यम से मेदिनीनगर में बैठे संतोष को भेजता था. इसके बाद मेदिनीनगर से मेदिनीनगर सदर अस्पताल के नाम का हूबहू जाली डिजिटल सर्टिफिकेट बनकर वापस आता था. इस एक जाली सर्टिफिकेट के बदले गरीब और सीधे-साधे लोगों से 1000 रुपये से लेकर 1400 रुपये तक की अवैध वसूली की जाती थी. संचालक ने स्वीकार किया कि वह अब तक 30 से 40 जाली जन्म प्रमाण पत्र बनाकर बाजार में खपा चुका है.

जारी किए गए सभी जाली सर्टिफिकेट होंगे रद्द

एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह एक गंभीर और संगठित अपराध है. छापेमारी के दौरान सेंटर से भारी मात्रा में लोगों के पहचान पत्रों की फोटोकॉपी, जाली सर्टिफिकेट और आवेदन फॉर्म जब्त किए गए हैं. इस रैकेट के मास्टरमाइंड मेदिनीनगर के संतोष कुमार और सेंटर संचालक विशाल कुमार समेत सभी आरोपियों के खिलाफ मेराल थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है. साथ ही जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन कर दिया गया है. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस फर्जी रैकेट के जरिए जितने भी जन्म प्रमाण पत्र जारी हुए हैं, उन्हें चिन्हित कर तत्काल रद्द किया जाएगा. साथ ही अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी सर्टिफिकेट के लिए केवल सरकारी प्रज्ञा केंद्र या आधिकारिक अधिकृत पोर्टल का ही इस्तेमाल करें, अन्यथा फर्जी कागजात बनवाने वालों पर भी कानूनी गाज गिर सकती है.

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Published by: Sameer Oraon

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