कोसडीहरा जंगल में आग से अफरा-तफरी, 5 बीघा जंगल जलकर खाक

कोसडीहरा जंगल में आग से अफरा-तफरी, 5 बीघा जंगल जलकर खाक

ग्रामीणों और दमकल की मदद से आग पर काबू, हर साल दोहराई जा रही लापरवाही पर उठे सवाल संदीप कुमार, केतार केतार प्रखंड के कोसडीहरा जंगल में गुरुवार दोपहर अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गयी. आग तेजी से गांव की ओर बढ़ने लगी, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गयी. घटना की सूचना मिलते ही ग्राम पंचायत लोहरगड़ा के मुखिया प्रतिनिधि सीताराम शर्मा और रामाकांत भारती ने प्रशासन को जानकारी दी. इसके बाद छोटेलाल पासवान, अरविंद पासवान सहित कई ग्रामीण मौके पर पहुंचकर आग बुझाने में जुट गये. ग्रामीणों ने लाठी-डंडों से पीट-पीटकर आग पर काबू पाने की कोशिश की और काफी हद तक सफल रहे. सूचना मिलने पर प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रशांत कुमार, वनरक्षक ओम प्रकाश उरांव, वनकर्मी निशांत कुमार और दमकल की टीम भी मौके पर पहुंची. दमकल कर्मियों ने सड़क किनारे फैली आग को बुझाया, लेकिन पथरीला रास्ता होने के कारण वाहन जंगल के अंदर नहीं जा सका. इस घटना में करीब 5 बीघा जंगल जलकर नष्ट हो गया. हालांकि आग गांव की झोपड़ियों और मवेशियों तक नहीं पहुंची, जिससे बड़ा हादसा टल गया. हर साल दोहराई जा रही लापरवाही हर साल गर्मी और महुआ सीजन में इस क्षेत्र के जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं. महुआ चुनने के लिए कुछ लोग जानबूझकर आग लगा देते हैं, जिससे बड़ा वन क्षेत्र प्रभावित होता है. इसके बावजूद वन विभाग की ओर से न तो पहले से तैयारी की जाती है और न ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है. कोसडीहरा जंगल में पहले भी आग लग चुकी है. 30 मार्च 2021 और 28 मई 2022 को भी यहां भीषण आग लगी थी, जिससे जंगल और ग्रामीणों को नुकसान हुआ था. इसके बावजूद अब तक ठोस कदम नहीं उठाये गये हैं. जागरूकता की कमी से हो रही घटना स्थानीय स्तर पर वन समिति की निष्क्रियता, जागरूकता की कमी और वन विभाग की निगरानी के अभाव को इस तरह की घटनाओं का मुख्य कारण माना जा रहा है. जंगल में आग लगने से पर्यावरण, जैव विविधता, वन्यजीव और स्थानीय जलवायु पर गंभीर असर पड़ता है. वनकर्मी निशांत कुमार ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है. आग लगाने वाले की पहचान की जा रही है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. जानकारों का कहना है कि जंगल में आग रोकने के लिए समय पर फायर लाइन बनाना, ग्रामीणों को जागरूक करना, वन समितियों को सक्रिय करना और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करना जरूरी है. अन्यथा हर साल इसी तरह जंगल जलते रहेंगे और पर्यावरण को नुकसान होता रहेगा.

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Author: Akarsh Aniket

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