हाथियों के आतंक से खेती छोड़ने को मजबूर किसान

धुरकी प्रखंड क्षेत्र के कनहर नदी तटीय इलाके में हाथियों के एक बार फिर से प्रवेश करने के कारण ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया है.

प्रतिनिधि, धुरकी

धुरकी प्रखंड क्षेत्र के कनहर नदी तटीय इलाके में हाथियों के एक बार फिर से प्रवेश करने के कारण ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया है. पिछले वर्ष हाथी के आतंक का दंश झेल चुके किसान इस बार खेती करने से भी डर रहे हैं. कहीं फिर से कोई बड़ी अनहोनी न हो जाये, इसी आशंका में लोग दिन-रात भयभीत हैं. गौरतलब है कि वन विभाग द्वारा प्रखंड क्षेत्र के चार पंचायतों – भंडार, अंबाखोरिया, खाला और खुटिया को पहले ही हाथी जोन घोषित कर दिया गया है. विभाग की ओर से इन इलाकों के लोगों को पहले से ही सतर्क रहने की चेतावनी दी गयी थी.

ताजा घटना में परासपानी कला गांव की कांति देवी के आम के बागान में बीती रात हाथियों का झुंड घुस आया. करीब 10 हाथियों ने बागान को पूरी तरह नष्ट कर दिया. हाथियों के उत्पात से ग्रामीणों में दहशत फैल गयी. घटना के बाद हाथियों का यह झुंड कनहर नदी के जंगल में लौट गया, लेकिन क्षेत्र में भय का माहौल अभी भी बरकरार है.

कनहर नदी के किनारे बसे बालचौरा और पंचफेड़ी गांव के करीब 20 घरों के किसान हाथी के डर से इस बार खेती नहीं करने का मन बना रहे हैं. इन किसानों में बीरबल परिया, जटु सिंह, नाथू परहिया, कांति देवी, विश्वनाथ परहिया, जोगिंदर चंद्रवंशी, मदन सिंह, नारायण शाह, इंद्रदेव सिंह, लखन परहिया, केवल सिंह समेत कई किसान शामिल हैं. इन किसानों का कहना है कि वे जंगल के किनारे कठिन मेहनत से खेती करते हैं, लेकिन फसल पकते ही हाथियों का झुंड आकर सब कुछ नष्ट कर देता है. उनके खून-पसीने की कमाई पल भर में तबाह हो जाती है. वहीं वन विभाग से मिलने वाला मुआवजा बेहद कम होता है, जिससे नुकसान की भरपाई संभव नहीं है.

ग्रामीणों ने बताया कि इस बार करीब 50 से 60 एकड़ जमीन पर हाथियों के भय से खेती नहीं की जायेगी. हाथियों की आमद की सूचना मिलते ही मुखिया प्रतिनिधि हरीलाल सिंह और समाजसेवी राजकुमार विश्वकर्मा मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. इस संबंध में पूछे जाने पर वनपाल प्रमोद कुमार ने कहा कि हाथी आने की सूचना मिली है और लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी गयी है. उन्होंने कहा कि वन विभाग लगातार निगरानी कर रहा है. उल्लेखनीय है कि पिछले रबी सीजन में भी हाथियों के झुंड ने इस इलाके में भारी तबाही मचायी थी. उस दौरान करीब 40 घर क्षतिग्रस्त हो गये थे. दो लोगों की हाथी द्वारा कुचलकर मौत हो गयी थी और दो दर्जन से अधिक मवेशी मारे गये थे. हाथियों के डर से अब ग्रामीण जंगल जाना भी बंद कर चुके हैं.ग्रामीणों ने प्रशासन से इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने और मुआवजा राशि में सुधार करने की मांग की है.

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