हाथियों का आतंक जारी, धान-मकई की फसल रौंदकर बर्बाद, किसानों में आक्रोश

हाथियों के झुंड ने गढ़वा जिले में किसानों की धान और मकई की फसलों को रौंदकर बर्बाद कर दिया है. फसलों के नुकसान से ग्रामीण चिंतित हैं और मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं.

Rampage by elephants: गढ़वा जिला के चिनिया प्रखंड क्षेत्र में हाथियों के झुंड का उत्पात लगातार जारी है. सोमवार की रात अलग-अलग झुंड में पहुंचे हाथियों ने बेता और चिनिया गांव में किसानों की धान और मकई की फसल को खाकर और रौंदकर बर्बाद कर दिया. फसलों के नुकसान से किसानों में आक्रोश है. ग्रामीणों ने हाथियों से फसल बचाने के लिए वन विभाग की ओर से प्रभावी पहल नहीं किये जाने पर नाराजगी जताई है.

बेता गांव में करीब 10 हाथियों के झुंड ने कई किसानों की फसल को नुकसान पहुंचाया. हाथियों ने चैतु सिंह के एक एकड़ खेत में लगी धान की फसल और शिवशंकर सिंह के एक एकड़ खेत की धान की फसल को नष्ट कर दिया. इसके अलावा बंधु सिंह की मकई तथा वीरेंद्र सिंह और मोहन सिंह की धान की फसल भी हाथियों ने बर्बाद कर दी.

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वहीं, चिनिया गांव में 12 से 14 हाथियों के झुंड ने रामधवल यादव की मकई, हबीब अंसारी की धान और जिधन यादव के खेत में लगी मकई की फसल को खाकर और रौंदकर बर्बाद कर दिया. इसके अलावा हाथियों ने अन्य किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचाया है.

जांच के बाद मिलेगा मुआवजा

फसल नुकसान की सूचना मिलने के बाद वन विभाग ने वनरक्षी पासकल को स्थल पर भेजकर जांच कराई. वनरक्षी ने बेता गांव पहुंचकर हाथियों से हुए फसल नुकसान का जायजा लिया और आकलन रिपोर्ट विभाग को सौंप दी.

वनपाल उत्तम कुमार ने बताया कि किसानों की फसल को हुए नुकसान की जानकारी मिली है. स्थल जांच के आधार पर नुकसान का आकलन कराया गया है. रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार वन विभाग की ओर से किसानों को क्षतिपूर्ति राशि दी जाएगी.

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By Avinash Singh

अविनाश कुमार सिंह प्रभात खबर के गढ़वा ब्यूरो चीफ हैं. वह आंचलिक से लेकर राज्य मुख्यालय तक 27 वर्ष से अधिक की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग, हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू और खोजी पत्रकारिता.में इन्हें महारत हासिल है. अविनाश कुमार सिंह झारखंड की पत्रकारिता और 'प्रभात खबर' के विश्वसनीय चेहरा हैं, जिन्होंने खबरों की गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता दी है. लगभग तीन दशकों (27 वर्ष) के अपने लंबे सफर में उन्होंने पलामू ब्यूरो प्रमुख के रूप में 10 साल से अधिक समय तक नेतृत्व किया. इसके बाद प्रदेश मुख्यालय (रांची) में काम करते हुए, विशेषकर वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान, उनके सटीक चुनावी विश्लेषण और राजनीतिक रिपोर्टिंग ने काफी प्रभाव छोड़ा.उनकी लेखनी का दायरा बेहद व्यापक है—संवेदनशील क्राइम रिपोर्टिंग से लेकर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के इंटरव्यू तक, उनकी हर खबर चर्चा में रही है. पत्रकारिता के माध्यम से कई बड़े मामलों का उद्भेदन करना उनकी विशेष पहचान है.झारखंड राज्य गठन के बाद अविनाश ने पलामू में काम करते हुये राजनीतिक से जुड़ी कई ऐसी खबर को ब्रेक किया ,जिसका असर राज्य की राजनीतिक पड़ा .प्रयोगधर्मी पत्रकार के रूप में भी इनकी पहचान है .संस्थान के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 'बेस्ट एम्प्लोयी' जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. प्रभात खबर के संघर्ष से लेकर इसके विकास और उत्थान के सफर में अविनाश एक सक्रिय सहभागी और सहयात्री रहे हैं.

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