सदर अस्पताल में सिर्फ छह घंटे इसीजी सेवा, बाकी समय मरीज लाचार

यदि आपके घड़ी में दोपहर के 3:30 बजे हैं,आपके किसी परिजन या जानने वाले व्यक्ति के सीने अचानक दर्द उठा है.

प्रभाष मिश्रा,गढ़वा यदि आपके घड़ी में दोपहर के 3:30 बजे हैं,आपके किसी परिजन या जानने वाले व्यक्ति के सीने अचानक दर्द उठा है. आप इलाज के लिए गढ़वा के सदर अस्पताल जाना चाहते हैं. थोड़ा रूक जाये,कहीं दूसरे अस्पताल में हीं जाने की सोचे, क्योंकि गढ़वा के सदर अस्पताल में इसीजी कराने के लिए सुबह के नौ बजे का इंतजार करना पड़ेगा. आज के दौर में सुनने में यह बात भले ही अविश्वसनीय लगे, पर है यह सच. गढ़वा सदर अस्पताल में 24 घंटों मात्र छह घंटे ओपीडी में ही इसीजी की सुविधा उपलब्ध है. बताया जाता हैं यदि रात या फिर सुबह में नौ बजे से पहले कोई ही हृदय रोगी सदर अस्पताल पहुंचता है, तो प्राइवेट में जा कर अपना इसीजी कराना पड़ता हैं. ऐसा तकनीशियन के अभाव में हो रहा हैं. इसीजी करने के लिए सदर अस्पताल में मात्र एक तकनीशियन है, जिसकी सेवा ओपीडी में सुबह नौ बजे से दोपहर के तीन बजे तक हैं. उक्त तकनीशियन के जाने के बाद अगले 18 घंटे के लिए यह सेवा अघोषित तौर पर बंद हों जाता है. यह स्थिति तब हैं ,जब गढ़वा रैंकिंग में नंबर वन हैं यह स्थिति तब हैं जब देश भर के आकांक्षी ज़िलों की डेल्टा रैंकिंग में गढ़वा जिला माह जनवरी और फरवरी 2025 में लगातार प्रथम स्थान प्राप्त किया हैं.उसके बाद भी आलम यह हैं जिला के सदर अस्पताल में 24 घंटे इसीजी की सुविधा उपलब्ध नहीं हैं, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल क्या है. हालांकि व्यवस्था में सुधार को लेकर डीसी दिनेश कुमार यादव गंभीर है. स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को जानने के बाद जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में डीसी में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो, इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया हैं. देखना होगा उपायुक्त के निर्देश का कितना असर गढ़वा जिला के स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ता है. क्या कहते हैं सिविल सर्जन गढ़वा के सिविल सर्जन डॉ अशोक कुमार का कहना है कि यह सही है तकनीशियन की कमी है. उसकी ड्यूटी छह घंटे के लिए ही हैं. लेकिन इमरजेंसी के लिए चिकित्सकों को कहा गया वे लोग इसीजी करें, ताकि मरीजों को ��रेशानी न हों कब पड़ती हैं इसीजी की जरूरत चिकित्सकों के अनुसार यदि किसी के भी सीने में दर्द या दिल की धड़कन तेज होने जैसे लक्षण हों तो उस परिस्थिति में चिकित्सकों द्वारा इसीजी कराने की सलाह दी जाती हैं, ताकि दर्द के वास्तविक कारणों का पता चल सके. अस्पताल में इसकी व्यवस्था बहुत हीं आवश्यक हैं 30 की जगह तीन सौ खर्च गढ़वा सदर अस्पताल में सिर्फ ओपीडी के समय हीं इसीजी की सुविधा उपलब्ध हैं. सदर अस्पताल में इसका शुल्क तीस रुपया हैं. जबकि प्राइवेट में लोग को इस सुविधा के लिए 300 से 400 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं.

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Published by: Deepak

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