जिले में सॉकपीट निर्माण में गड़बड़ी, मानक के अनुरूप नहीं हो रहा काम

जिले में तरल कचड़ा प्रबंधन के लिए बनाये जा रहे हैं सोख्ता

जिले में तरल कचड़ा प्रबंधन के लिए बनाये जा रहे हैं सोख्ता पीयूष तिवारी, गढ़वा स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेज-टू के तहत पूरे जिले में तरल कचड़ा प्रबंधन के लिए सॉकपीट (पक्का सोख्ता गड्ढा) का निर्माण किया जा रहा है. लेकिन इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायतें सामने आ रही हैं. जिले में जैसे-तैसे सॉकपीट का निर्माण कर किया जा रहा है. इससे योजना के औचित्य पर सवाल उठने लगे हैं. मात्र दो से ढाई फीट गड्ढा खोदकर और एक-डेढ़ ईंच मोटे ढक्कन का निर्माण कर कोरम पूरा किया जा रहा है. ढक्कन को सभी तरफ से जाम करना है, वह भी नहीं किया जा रहा है. इसके अलावा चापाकल से लेकर सोख्ता तक कनेक्ट करने के लिए पक्की नाली का निर्माण भी नहीं किया जा रहा है. इसका निर्माण ग्राम जल स्वच्छता समिति के माध्यम से किया जा रहा है, लेकिन इसमें बड़े पैमाने पर बिचौलियागिरी हावी है. सभी चापकलों के पास सॉकपीट अनिवार्य स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण-टू के तहत तरल कचड़ा प्रबंधन के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को 74.17 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं. इसी राशि से जिले में सॉकपीट का निर्माण किया जा रहा है. जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जहां-जहां चापाकल का अधिष्ठापन किया गया है, वहां इसका निर्माण किया जाना है. चाहे चापाकल किसी भी मद से लगाया गया हो. हालांकि विभाग के पास जिले में कितने चापाकल हैं, इसका आंकड़ा मौजूद नहीं है. प्रत्येक सॉकपीट निर्माण पर 9675 रुपये खर्च किये जाने हैं. तीन घरों के बीच सॉकपीट निर्माण पर 23300 रूपये, पांच घरों के बीच 77 हजार रुपये और 10 घरों के बीच 1.03 लाख रुपये खर्च किये जाने हैं. 31 मार्च तक जिले में 418 सॉकपीट निर्माण के एवज में कुल 40.44 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि हजारों सॉकपीट का निर्माण हुआ हैं, जिनका भुगतान अभी शेष है. सॉकपीट निर्माण का मानक सॉकपीट में चार फीट गहरा गड्ढा बनाना है. इसकी गोलाई (वृत) तीन फीट होनी चाहिए. ढक्कन चार ईंच मोटी होना चाहिए. चापाकल से सॉकपीट तक 10 फीट पक्का नाली बनानी है, जिसमें प्राक्कलन अनुसार 270 ईंट लगेंगे. लेकिन इस मानक के अनुसार सॉकपीट का निर्माण नहीं किया जा रहा है. गुणवत्ता सही नहीं होने पर रोक दिया जा रहा भुगतान : अजय सिंह पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता अजय सिंह ने बताया कि राशि का भुगतान करने के पूर्व इंजिनियर से इसकी जांच करायी जाती है, जहां-जहां गुणवतापूर्ण व गैरजरूरत वाला सॉकपीट बन रहा है, उसका भुगतान रोक दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि उन्होंने हाल ही में गढ़वा के जाटा गांव में 60 सॉकपीट का भुगतान रोक दिया है, क्योंकि वहां सभी घर में सॉकपीट बना दिया गया था.

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By Akarsh aniket

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