नंद कुमार, रंका
अनुमंडलीय मुख्यालय रंका में स्कूल जाने वाले बच्चे प्रतिदिन ऑटो की छत पर बैठकर स्कूल आना-जाना करते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. इसके बाद भी इस पर रोक लगाने को लेकर आज तक प्रशासन के स्तर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गयी है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सड़क सुरक्षा जैसे विषय सिर्फ कागजों तक ही सीमित होकर रह गये हैं. रंका के लिए यह कोई नयी समस्या नहीं है. रोजाना ऑटो चालक ऑटो पर विद्यार्थियों को नीचे–ऊपर लोड कर थाना मोड़ के समीप से गुजरते हैं. ऑटो पर विद्यार्थियों को ठूंस–ठूंस कर भरा जाता है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. ग्रामीण क्षेत्र सोनदाग, सिकठ, जोगीखुरा, भलुआनी, मुंगदह, मझिगांवा, रंकाखुर्द से रंका परियोजना कन्या उच्च विद्यालय, प्लस टू उच्च विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र–छात्राएं प्रतिदिन टेंपो में ऊपर–नीचे बैठकर आते हैं. आरोप है कि अधिकांश ऑटो चालक नाबालिग हैं, जो बिना ड्राइविंग लाइसेंस के ऑटो चलाते हैं. लेकिन आज तक कभी इसे लेकर कोई पहल नहीं की गयी. यह स्थिति तब है जब गढ़वा जिला मुख्यालय में स्कूल बसों की जांच हो रही है, दूसरी तरफ उसी जिला के अनुमंडलीय मुख्यालय का यह हाल है.
सुलग रहे सवाल
लोगों का कहना है कि रंका में बच्चों को टेंपो में ठूंसकर ले जाना केवल नियम का उल्लंघन नहीं, बल्कि मानव जीवन के साथ खिलवाड़ है. एक छोटी-सी दुर्घटना भी कई बच्चों के जीवन को खतरे में डाल सकती है. लोगों का कहना है कि बच्चों को सामान की तरह ओवरलोड किया जा रहा है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या परिवहन विभाग के लिए सीट क्षमता का नियम केवल कागजों तक सीमित है या फिर उसका दायरा ही जिला मुख्यालय तक है?आज से चलाया जायेगा चेकिंग अभियानः एसडीपीओ
एसडीपीओ रोहित रंजन सिंह ने कहा कि निश्चित तौर पर यह बेहद गंभीर मामला है. इसे लेकर रंका में ऑटो चेकिंग अभियान चलाया जायेगा. सभी ऑटो वाले को नोटिस भेजकर चेतावनी दी जायेगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
