छह जून से सरस्वतिया नदी पर अतिक्रमण करने वालों पर चलेगा बुलडोजर

छह जून से सरस्वतिया नदी पर अतिक्रमण करने वालों पर चलेगा बुलडोजर

जितेंद्र सिंह, गढ़वा गढ़वा शहर की पहचान मानी जाने वाली सरस्वतिया नदी आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है. कभी लोगों की प्यास बुझाने, खेतों की सिंचाई करने और धार्मिक आस्था का केंद्र रही यह नदी अब अतिक्रमण और प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रही है. हालांकि अब जिला प्रशासन ने नदी को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में कार्रवाई तेज कर दी है. 88 लोगों को नोटिस जारी किया गया है और छह जून के बाद अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया जायेगा. सदर एसडीएम संजय कुमार ने बताया कि नदियों एवं अन्य जल स्रोतों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है. इसी क्रम में सरस्वतिया नदी को मॉडल के रूप में चयनित किया गया है. नदी क्षेत्र में अतिक्रमण करने वाले 88 लोगों को नोटिस देकर 10 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने का अंतिम अवसर दिया गया था. नोटिस अवधि समाप्त होने के बाद छह जून से प्रभावी कार्रवाई शुरू की जायेगी. एसडीएम ने कहा कि अतिक्रमण हटने के बाद नदी का प्राकृतिक स्वरूप बहाल होगा और जल निकासी व्यवस्था भी बेहतर बनेगी. प्रशासन ने संबंधित लोगों से समय रहते अपना पक्ष रखने और निर्धारित प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की है. शहर में नदी के कई स्थानों पर अतिक्रमण मेराल प्रखंड के गोंदा स्थित किउन आहर से निकलने वाली सरस्वतिया नदी लगभग 14 किलोमीटर का सफर तय कर गढ़वा शहर से होते हुए सोनपुरवा के पास दानरो नदी में मिलती है. यह नदी नवादा, जोबरईया और नगवां समेत कई इलाकों से होकर गुजरती है. लेकिन शहर में प्रवेश करते ही नदी पर अतिक्रमण का असर साफ दिखाई देता है. कई स्थानों पर नदी किनारे चहारदीवारी खड़ी कर दी गयी है, जबकि कुछ जगहों पर दो मंजिला मकान तक बना दिये गये हैं. कई हिस्सों में नदी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र को संकरा कर दिया गया है. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद बढ़ी उम्मीद इधर शुक्रवार को झारखंड के मुख्यमंत्री ने शहरी विकास व आवास विभाग की बैठक में स्पष्ट कहा कि शहरों की नदियां, तालाब, डैम, नाले और अन्य जलस्रोत राज्य की जीवनरेखा हैं. इन पर अवैध अतिक्रमण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शहरों से गुजरने वाली नदियों, नालियों, तालाबों और अन्य जलस्रोत क्षेत्रों पर बने अवैध निर्माण को तत्काल चिह्नित कर कार्रवाई की जाये. साथ ही अतिक्रमण कर बनाये गये मकानों का सर्वे कराने, नोटिस जारी करने, प्राथमिकी दर्ज कराने और अवैध संरचनाओं को ध्वस्त करने का निर्देश भी दिया गया है. इससे गढ़वा के लोगों में उम्मीद बढ़ी है.

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Author: Akarsh Aniket

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