केतार. पिछले एक माह से काले सांड के आतंक से परेशान ग्रामीणों के आवेदन के बाद वन विभाग और पशुपालन विभाग की टीम ने मंगलवार को संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान चलाया. सांड को पकड़ने के लिए दूसरी बार पहुंची पशुपालन विभाग और पलामू टाइगर रिजर्व की टीम को करीब पांच घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी. बेहोशी की दवा, रस्सी का फंदा और करीब आठ किलोमीटर तक पीछा करने के बाद टीम ने सांड को पकड़ लिया, लेकिन पिकअप वाहन पर चढ़ाने के दौरान रस्सी खुलने से वह फिर भाग निकला.
दवा देने के बाद भी बेकाबू होकर दौड़ा सांड
रेस्क्यू अभियान के दौरान टीम ने पहले सांड को नियंत्रित करने के लिए बेहोशी की दवा दी. दवा का असर पूरी तरह नहीं होने पर गनशॉट के माध्यम से अतिरिक्त दवा देने का प्रयास किया गया. इसके बाद सांड अचानक बेकाबू होकर दौड़ने लगा. टीम के सदस्यों ने करीब आठ किलोमीटर तक उसका पीछा किया और सुरक्षित दूरी बनाकर उसे घेरने का प्रयास किया.
रस्सी के फंदे से पकड़ा, फिर हाथ से निकल गया
दवा का असर बढ़ने के बाद पलामू टाइगर रिजर्व की टीम ने रस्सी के सहारे फंदा डालकर सांड को पकड़ लिया. इसके बाद पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने उसकी नसबंदी की. हालांकि, सांड को पिकअप वाहन पर चढ़ाने के दौरान अचानक रस्सी खुल गयी और वह फिर भाग निकला.
करीब पांच घंटे तक चले अभियान के बावजूद सांड को आबादी से दूर सुरक्षित स्थान पर ले जाने में सफलता नहीं मिली. मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने पूरे घटनाक्रम को देखा.
ग्रामीणों ने विशेषज्ञ टीम भेजने की मांग की
ग्रामीणों ने प्रशासन से विशेषज्ञ टीम भेजकर सांड को सुरक्षित तरीके से पकड़ने और आबादी से दूर ले जाने की मांग की है.
रेस्क्यू टीम में ये रहे शामिल
रेस्क्यू टीम में पशुपालन विभाग के डॉक्टर रामप्रवेश राम, डॉ चंदन, डॉ नीरज कांत, पलामू टाइगर रिजर्व के डॉ सुनील देव, पाल भगत, एस आई आदित्य कुमार समेत ग्रामीण अक्षय कुमार गुप्ता, रामाशीष यादव, राम अवध यादव, प्रेमचंद गुप्ता, शिवपूजन जायसवाल, मनीष कमलापुरी, गुड्डू प्रजापति, राजीव रंजन साह, वाल्मीकि साह, अरविंद प्रजापति, लखन प्रजापति आदि मौजूद थे.
