ईरानी मूल के लोगों पर विधायक के बयान से गरमायी राजनीति, झामुमो ने बताया भ्रामक

गढ़वा में एसआइआर प्रक्रिया के दौरान कथित ईरानी मूल के लोगों पर भाजपा विधायक के बयान को लेकर राजनीति गरमा गई है। झामुमो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विधायक के बयान को झूठा बताया है.

गढ़वा. गढ़वा में एसआइआर प्रक्रिया के दौरान मिले कथित ईरानी मूल के लोगों को लेकर भाजपा विधायक के बयान पर झामुमो ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. पार्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विधायक के बयान को काल्पनिक, भ्रामक और राजनीतिक हताशा का परिणाम बताया.

झामुमो के केंद्रीय सदस्य जवाहर पासवान ने कहा कि विधायक जिस कथित ईरानी मूल के लोगों की बात कर रहे हैं. वर्ष 2016-17 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नगर परिषद गढ़वा के वार्ड नंबर तीन में उन्हें आवास उपलब्ध कराने में विधायक की भी भूमिका रही थी. उन्होंने कहा कि उस समय केंद्र और झारखंड में भाजपा की सरकार थी तथा स्थानीय विधायक और नगर परिषद अध्यक्ष भी भाजपा से थे.

झामुमो नेताओं ने कहा कि एसआइआर भारत निर्वाचन आयोग की देखरेख में चलने वाली प्रक्रिया है. ऐसे में इस तरह के बयान निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हैं. पार्टी ने कहा कि विधायक के पास यदि अपने दावों के समर्थन में ठोस तथ्य या प्रमाण हैं, तो उन्हें जिला निर्वाचन पदाधिकारी और गृह मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए.

जिला सचिव ने एमएमडीआर कानून को लेकर भी भाजपा पर जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया. मौके पर कोषाध्यक्ष चंदन जायसवाल, वरिष्ठ नेता मनोज तिवारी, युवा मोर्चा प्रवक्ता सुजीत चंद्रवंशी, रंथा नायक, प्रियम सिंह, हरिओम यादव और लल्लू मेहता सहित अन्य मौजूद थे.

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By Avinash Singh

अविनाश कुमार सिंह प्रभात खबर के गढ़वा ब्यूरो चीफ हैं. वह आंचलिक से लेकर राज्य मुख्यालय तक 27 वर्ष से अधिक की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग, हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू और खोजी पत्रकारिता.में इन्हें महारत हासिल है. अविनाश कुमार सिंह झारखंड की पत्रकारिता और 'प्रभात खबर' के विश्वसनीय चेहरा हैं, जिन्होंने खबरों की गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता दी है. लगभग तीन दशकों (27 वर्ष) के अपने लंबे सफर में उन्होंने पलामू ब्यूरो प्रमुख के रूप में 10 साल से अधिक समय तक नेतृत्व किया. इसके बाद प्रदेश मुख्यालय (रांची) में काम करते हुए, विशेषकर वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान, उनके सटीक चुनावी विश्लेषण और राजनीतिक रिपोर्टिंग ने काफी प्रभाव छोड़ा.उनकी लेखनी का दायरा बेहद व्यापक है—संवेदनशील क्राइम रिपोर्टिंग से लेकर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के इंटरव्यू तक, उनकी हर खबर चर्चा में रही है. पत्रकारिता के माध्यम से कई बड़े मामलों का उद्भेदन करना उनकी विशेष पहचान है.झारखंड राज्य गठन के बाद अविनाश ने पलामू में काम करते हुये राजनीतिक से जुड़ी कई ऐसी खबर को ब्रेक किया ,जिसका असर राज्य की राजनीतिक पड़ा .प्रयोगधर्मी पत्रकार के रूप में भी इनकी पहचान है .संस्थान के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 'बेस्ट एम्प्लोयी' जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. प्रभात खबर के संघर्ष से लेकर इसके विकास और उत्थान के सफर में अविनाश एक सक्रिय सहभागी और सहयात्री रहे हैं.

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