भवनाथपुर में गैस सिलेंडर की गाड़ी देख मची अफरा-तफरी, लकड़ी के भरोसे चल रहे होटल

LPG Cylinder Crisis: गढ़वा के भवनाथपुर में 15 दिनों से गैस संकट से लोग परेशान हैं. सिलेंडर पहुंचते ही एजेंसी पर भीड़ उमड़ पड़ी. सीमित आपूर्ति के कारण कई उपभोक्ता खाली लौटे. होटल लकड़ी और कोयले पर चल रहे हैं. लोगों ने प्रशासन से नियमित गैस आपूर्ति और स्थायी समाधान की मांग की है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

भवनाथपुर से विजय सिंह की रिपोर्ट

LPG Cylinder Crisis: झारखंड के गढ़वा जिले के भवनाथपुर प्रखंड में रसोई गैस की भारी किल्लत ने आम लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. पिछले करीब 15 दिनों से गैस आपूर्ति ठप रहने के कारण उपभोक्ता परेशान थे. शुक्रवार को जैसे ही यह खबर फैली कि गैस सिलेंडर से भरा ट्रक एजेंसी पर पहुंचा है, सैकड़ों लोग अपने खाली सिलेंडर लेकर वहां पहुंच गए. देखते ही देखते एजेंसी परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई और अफरा-तफरी का माहौल बन गया.

300 सिलेंडर पहुंचे, लेकिन मांग कहीं ज्यादा

जानकारी के अनुसार, एजेंसी में करीब 300 सिलेंडर ही उपलब्ध कराए गए थे, जबकि उपभोक्ताओं की संख्या इससे कई गुना अधिक थी. ऐसे में हर कोई पहले सिलेंडर लेने की होड़ में नजर आया. लोग सुबह से ही लाइन में खड़े हो गए थे, लेकिन सीमित आपूर्ति के कारण कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा. इससे उपभोक्ताओं में नाराजगी और बढ़ गई.

सूचना फैलते ही हर तरफ मची भगदड़ जैसी स्थिति

गैस आने की सूचना पूरे क्षेत्र में आग की तरह फैल गई. ग्रामीण इलाकों से लेकर कस्बाई क्षेत्रों तक के लोग तुरंत एजेंसी की ओर दौड़ पड़े. महिलाओं और बुजुर्गों की भी लंबी कतारें देखने को मिलीं. भीड़ इतनी ज्यादा थी कि एजेंसी कर्मियों को व्यवस्था संभालने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा. कई जगह हल्की धक्का-मुक्की की भी स्थिति बनी.

एचपी गैस आपूर्ति बाधित, उपभोक्ता परेशान

बताया जा रहा है कि भवनाथपुर क्षेत्र में पिछले दो हफ्तों से एचपी गैस की आपूर्ति बाधित थी. इस वजह से न केवल ग्रामीण बल्कि शहरी उपभोक्ता भी प्रभावित हुए हैं. रोजमर्रा के कामकाज में गैस की अहम भूमिका होती है, ऐसे में इसकी कमी ने लोगों की दिनचर्या को पूरी तरह बिगाड़ दिया है.

भारत गैस एजेंसी हटने से बढ़ी समस्या

गौरतलब है कि पहले भवनाथपुर में भारत गैस की एजेंसी भी संचालित होती थी, जिसका संचालन सेल भवनाथपुर की सहकारिता साख समिति के जिम्मे था. लेकिन सेल की गतिविधियां बंद होने के बाद यह एजेंसी केतार प्रखंड में स्थानांतरित कर दी गई. इसके चलते स्थानीय लोगों के पास गैस लेने के विकल्प सीमित हो गए हैं और वे एक ही एजेंसी पर निर्भर हो गए हैं.

होटल-रेस्टोरेंट पर पड़ा सीधा असर

गैस की कमी का असर स्थानीय व्यापार पर भी साफ दिख रहा है. भवनाथपुर के कई होटल और रेस्टोरेंट पिछले कई दिनों से गैस के अभाव में लकड़ी और कोयले के सहारे काम चला रहे हैं. होटल संचालकों का कहना है कि इससे न केवल लागत बढ़ रही है, बल्कि खाना बनाने में अधिक समय भी लग रहा है. साथ ही धुएं और प्रदूषण की समस्या भी बढ़ गई है.

घरेलू महिलाओं की बढ़ी परेशानी

गृहिणियों के लिए यह संकट और भी गंभीर हो गया है. गैस की अनुपलब्धता के कारण उन्हें पारंपरिक चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे समय और मेहनत दोनों ज्यादा लग रहे हैं. कई घरों में खाना बनाने का समय बदल गया है और दिनचर्या प्रभावित हो रही है. महिलाओं ने प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की है.

प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि हर कुछ महीनों में गैस की किल्लत सामने आ जाती है. उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में गैस आपूर्ति को नियमित और सुचारू बनाया जाए. साथ ही एक अतिरिक्त गैस एजेंसी की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की परेशानी से लोगों को राहत मिल सके.

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सिस्टम की खामियों ने बढ़ाई मुश्किलें

यह पूरा मामला स्थानीय वितरण व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है. सीमित आपूर्ति, एकमात्र एजेंसी पर निर्भरता और समय पर गैस नहीं पहुंचने जैसी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं. अगर जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह संकट और गहरा सकता है.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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