गढ़वा से अविनाश की रिपोर्ट
गढ़वा में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए सरकार ने बायोमेट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था लागू की. सरकार के इस पहल का उद्देश्य है- शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित हो. साथ ही दूर-दराज के स्कूलों में पठन-पाठन का माहौल सुधरे. लेकिन गढ़वा जिले के चिनिया प्रखंड स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सिगसीगा कला का ताजा मामला यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि तकनीक से सिर्फ कागजी या डिजिटल हाजिरी बढ़ाई जा सकती है, वास्तविक शिक्षण के लिए कार्य का मानक तैयार करना और मानसिकता बदलना अब भी सबसे बड़ी चुनौती है.
प्रशासनिक सख्ती केवल कागजों तक सीमित
तकनीक से डिजिटल उपस्थिति तो लगी, पर कर्तव्यबोध गायब सरकार और प्रशासन आकांक्षी जिला के तहत शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए लगातार संसाधन और तकनीक झोंक रहे हैं. लेकिन जमीनी धरातल पर बायोमेट्रिक हाजिरी का तोड़ भी ढूंढ लिया गया है. सिगसीगा कला विद्यालय में शिक्षकों द्वारा सुबह उपस्थिति दर्ज कराने के तुरंत बाद घर चले जाने और फिर छुट्टी के वक्त आकर हाजिरी लगाने का पैटर्न यह दर्शाता है कि प्रशासनिक सख्ती केवल कागजों तक सीमित रह जाती है.
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स्थानीय लोग क्या कहते हैं?
लोगो का कहना हैं कि इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग सिस्टम से अधिकारी स्क्रीन पर हरी बत्ती (उपस्थिति) तो देख सकते हैं, लेकिन कक्षा में बच्चे पढ़ रहे हैं या शिक्षक घर पर आराम कर रहे हैं. यह देखने के लिए आज भी सामाजिक चेतना और प्रशासनिक निरीक्षण ही एकमात्र रास्ता है. जब तक शिक्षकों में नैतिक जिम्मेदारी और काम के प्रति निष्ठा का मानक नहीं बनेगा, तब तक कोई भी डिजिटल सिस्टम शिक्षा की गुणवत्ता की गारंटी नहीं दे सकता.
जनसुनवाई ने खोली व्यवस्था की पोल
हाल ही में समाहरणालय सभागार में आयोजित जिलास्तरीय जनसुनवाई के दौरान यह मामला प्रमुखता से सामने आया. चिनिया के बरवाडीह गांव के ग्रामीणों, पंचायत समिति सदस्य और वार्ड सदस्यों ने सामूहिक हस्ताक्षर युक्त आवेदन देकर जब उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा के सामने शिक्षकों की इस कार्यशैली का खुलासा किया, तो प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई.
ग्रामीणों ने शिक्षकों पर लगाया आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय शिक्षक उपस्थिति बनाकर गायब हो जाते हैं, जिससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है. विरोध करने पर अभिभावकों से अनुचित व्यवहार किया जाता है. हालांकि उपायुक्त ने मामले की उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, लेकिन यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि केवल शिकायतों के बाद कार्रवाई करने से व्यवस्था नहीं बदलेगी.मालूम हो कि गढ़वा जिला देश के आकांक्षी जिलों की सूची में शामिल है, जहां बुनियादी ढांचे से लेकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए विशेष बजट और योजनाएं चलाई जा रही हैं.
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