अविनाश की रिपोर्ट
गढ़वा: जिले को नशा मुक्त बनाने और युवाओं को नशे की काली गर्त में धकेलने वाले तंत्र पर शिकंजा कसने के लिए एक तरफ व्यापक स्तर पर अभियानों की रूपरेखा तैयार की जा रही है. वहीं दूसरी तरफ जिले के जिम्मेदार प्रशासनिक तंत्र की गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली भी खुलकर सामने आ गयी है.
'काम की अधिकता'
नार्कोटिक्स समन्वय समिति की मासिक बैठक नियमित रूप से न हो पाने के पीछे जब ड्रग इंस्पेक्टर ने 'काम की अधिकता' को वजह बताया, तो उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने इस ढुलमुल रवैये पर सख्त नाराजगी जतायी.अभियान की गंभीरता के विपरीत जब ड्रग इंस्पेक्टर ने व्यस्तता का हवाला देकर बैठकों के आयोजन में असमर्थता जतायी, तो बैठक का माहौल तल्ख हो गया.
लापरवाही बर्दाश्त नहीं
डीसी ने स्पष्ट किया कि नशा विरोधी अभियानों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी. उन्होंने प्रभारी पदाधिकारी (सामान्य शाखा) को कड़ा निर्देश दिया कि नार्कोटिक्स समन्वय समिति की मासिक बैठक हर महीने बिना किसी रुकावट के नियमित रूप से आयोजित करायी जाये, ताकि अभियानों की मॉनिटरिंग में कोई ढिलाई न आये.
स्कूल-कॉलेजों में चलेगा एंटी-ड्रग जागरूकता
अभियान जिले में फैलते नशे के जाल को काटने के लिए डीसी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) को सभी स्कूल-कॉलेजों में विशेष एंटी-ड्रग एब्यूज जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया है. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को नशीले पदार्थों के जानलेवा दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और उन्हें नशे से दूर रखना है.
लोगों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए भी ठोस कदम
सिर्फ जागरूकता ही नहीं, बल्कि नशे की गिरफ्त में आ चुके लोगों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए भी ठोस कदम उठाये जा रहे हैं. डीसी ने जिला समाज कल्याण पदाधिकारी को निर्देश दिया कि जिले में ड्रग डी-एडिक्शन (नशा मुक्ति) और पुनर्वास से संबंधित सभी आवश्यक इंतज़ाम और उपाय समय रहते सुनिश्चित किये जायें, ताकि पीड़ितों को सही इलाज और काउंसिलिंग मिल सके.
