गढ़वा से प्रभाष मिश्रा की रिपोर्ट
Garhwa News: झारखंड के गढ़वा जिला मुख्यालय में अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम और स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी करने वाले अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा अभियान शुरू किया है. शुक्रवार को सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ केनेडी ने शहर के कई निजी अस्पतालों में छापेमारी कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया. इस दौरान जिला डाटा मैनेजर सुजीत मुंडा भी मौजूद थे. जांच के दौरान कई अस्पतालों में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद सिविल सर्जन ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अस्पतालों को तत्काल बंद करने का निर्देश दिया.
डॉक्टरों की अनुपस्थिति में भर्ती मिले मरीज
जांच के दौरान जीएन हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद एक मरीज भर्ती पाया गया. वहीं सहारा हॉस्पिटल में एक मरीज को ब्लड चढ़ाया जा रहा था. इसके अलावा रिशु राज हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद पांच मरीज भर्ती मिले. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि किसी भी अस्पताल में मरीजों के इलाज के दौरान एक भी चिकित्सक मौजूद नहीं था. अस्पताल प्रबंधन की ओर से बताया गया कि ऑपरेशन डॉ. मनोज दास और डॉ. कुश कुमार की देखरेख में किए गए थे. सिविल सर्जन ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि डॉक्टर की अनुपस्थिति में मरीजों को भर्ती रखना उनकी जान के साथ सीधा खिलवाड़ है.
सरकारी डॉक्टरों की भूमिका पर भी उठे सवाल
छापेमारी के दौरान सिविल सर्जन डॉ. केनेडी ने यह भी कहा कि कुछ सरकारी चिकित्सक ड्यूटी खत्म होने के बाद निजी अस्पतालों में ऑपरेशन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि यही ऑपरेशन सरकारी अस्पतालों में किए जाएं तो गरीब और जरूरतमंद मरीजों को काफी राहत मिल सकती है. उन्होंने साफ कहा कि सरकारी सेवा में रहते हुए निजी अस्पतालों में इस तरह की गतिविधियां स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय स्तर पर भी जांच की जा सकती है.
झोलाछाप अस्पताल संचालकों को चेतावनी
सिविल सर्जन ने अवैध रूप से नर्सिंग होम चलाने वाले संचालकों और उनसे जुड़े चिकित्सकों को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि ऐसे अस्पतालों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी. डॉ केनेडी ने कहा कि बिना चिकित्सक और आवश्यक स्वास्थ्य मानकों के अस्पताल चलाना पूरी तरह गैरजिम्मेदाराना और खतरनाक है. मरीजों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जिन अस्पतालों से संतोषजनक जवाब नहीं मिलेगा, उन्हें बंद कर दिया जाएगा. यदि संचालक खुद अस्पताल बंद नहीं करते हैं तो प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए अस्पतालों को सील किया जाएगा.
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लगातार जारी रहेगा अभियान
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कार्रवाई केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगी. जिले में संचालित सभी निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम की जांच आगे भी जारी रहेगी. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मरीजों को सुरक्षित और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है. ऐसे में नियमों की अनदेखी करने वाले अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. छापेमारी के बाद शहर के निजी अस्पताल संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है. कई अस्पताल अब अपने दस्तावेज और व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में जुट गए हैं ताकि प्रशासनिक कार्रवाई से बचा जा सके.
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