पीटीआर में पैसेंजर ट्रेनों के परिचालन को रोकने का नहीं है प्रस्ताव : डायरेक्टर

बेतला : पलामू टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक एमपी सिंह ने स्पष्ट किया है कि पीटीआर में पैसेजर ट्रेनों के परिचालन पर रोक लगाने का प्रस्ताव नहीं लिया गया है. सिर्फ मालवाहक ट्रेनों के परिचालन पर रोक लगाते हुए उसे पीटीआर से बाहर के रेलवे मार्ग से गंतव्य तक परिचालन कराने प्रस्ताव लिया गया है. […]

बेतला : पलामू टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक एमपी सिंह ने स्पष्ट किया है कि पीटीआर में पैसेजर ट्रेनों के परिचालन पर रोक लगाने का प्रस्ताव नहीं लिया गया है. सिर्फ मालवाहक ट्रेनों के परिचालन पर रोक लगाते हुए उसे पीटीआर से बाहर के रेलवे मार्ग से गंतव्य तक परिचालन कराने प्रस्ताव लिया गया है.
लोगों को यह भ्रम हो गया है कि पीटीआर से पैसेंजर ट्रेन को भी रोकने का प्रस्ताव लिया गया है. उन्होंने बताया कि पीटीआर में गुजरने वाली रेलवे ट्रैक से प्रतिदिन 50 से अधिक मालवाहक ट्रेन गुजरते हैं. इस कारण वन व वन्य प्राणियों पर काफी असर पड़ा है. पलामू टाइगर रिजर्व रेलवे लाइन व सड़क मार्ग के कारण चार हिस्सों में बंट गया है.
इसलिए वन्य प्राणी स्वयं को असहज महसूस करते हैं. नतीजा यह होता है कि वे इस क्षेत्र से पलायन कर जाते हैं. इतना ही नहीं रेलवे लाइन पर ट्रेनों को गुजरने से अक्सर वन प्राणी मारे जाते हैं. कुछ वर्ष पहले इसी रेलवे ट्रैक पर नौ हाथियों की मौत ट्रेन से कट कर हो गयी थी. तब से इस मार्ग से गुजरने वाले ट्रेनों के स्पीड को कम करने के लिए रेल मंत्रालय को लिखा गया था, जिसके बाद इस क्षेत्र से गुजरने वाली ट्रेन का स्पीड कम होती है. लेकिन इन दिनों मालवाहक ट्रेनों की संख्या काफी बढ़ गयी है.
एक घंटे में ही औसतन चार से पांच ट्रेन गुजरती है. उन्होंने बताया कि इस मामले को लातेहार के प्रभारी मंत्री सरयू राय को अवगत कराया गया है, जिसके बाद उन्होंने आश्वासन दिया है कि इस मामले पर वह सक्रियता से काम करेंगे. श्री सिंह ने बताया कि जन समर्थन से ही जंगल को बचाया जा सकता है. इसलिए लोगों की राय ली जा रही है. कोई भी ऐसी योजना नहीं ली जायेगी, जो जन भावना के साथ खिलवाड़ हो. जहां तक ट्रेन के परिचालन की बात है, तो किसी भी सूरत में पैसेंजर ट्रेनों को पीटीआर से गुजरने पर रोक नहीं लगायी जायेगी. श्री सिंह ने यह भी कहा कि पलामू टाइगर रिजर्व को विकसित करने के लिए कई योजनाएं लिए जाने का प्रस्ताव है, जिसमें बेतला से नेतरहाट तक टूरिज्म सर्किट बनाया जायेगा. इसके लिए टूरिज्म विभाग से सहयोग लिया जा रहा है.
इको टूरिज्म के लिए काम किया जा रहा है. कई योजनाओं का डीपीआर तैयार कर लिया गया है. वहीं पार्क में सैलानी भ्रमण करने के लिए डीजल-पेट्रोल के वाहन का प्रयोग करते हैं, जिसे वन्य प्राणियों पर असर पड़ता है. इसलिए यह योजना भी लेने का प्रस्ताव है, जिसमें बैटरी चालित वाहन का प्रयोग हो.
टाइगर प्रोजेक्ट के वनों में मवेशियों का प्रवेश इस पर भी काम किया जायेगा. गांव से सटे चारागाह की व्यवस्था करायी जायेगी.वहीं बगल के गांवों के मवेशियों का टीकाकरण पर जोर दिया जायेगा, ताकि उनका इनफेक्शन जंगल के जानवरों में न हो. बेतला पार्क आनेवाले सैलानी बंदर, लंगूर, हिरण को किसी तरह के खाने पीने का चीज देने पर परहेज करें. यदि ऐसा किया जाता है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी.

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