हत्या के तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास

वर्ष 2001 में गढ़वा सदर अस्पताल के गेट पर हुई थी ब्रजकिशोर दुबे की हत्या दस हजार रुपया आर्थिक जुर्माना भी देना होगा गढ़वा : गढ़वा व्यवहार न्यायालय के जिला जज प्रथम जीके दुबे की अदालत में सत्र वाद सं 163/03 में शुक्रवार को हत्या के आरोप में तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा […]

वर्ष 2001 में गढ़वा सदर अस्पताल के गेट पर हुई थी ब्रजकिशोर दुबे की हत्या
दस हजार रुपया आर्थिक जुर्माना भी देना होगा
गढ़वा : गढ़वा व्यवहार न्यायालय के जिला जज प्रथम जीके दुबे की अदालत में सत्र वाद सं 163/03 में शुक्रवार को हत्या के आरोप में तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी है.
साथ ही तीनों पर 10 हजार रुपया आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है. सजा पानेवाले अभियुक्तों में मझिआंव थाना के कौआखोह निवासी नरेंद्र पांडेय, दलको निवासी सतीशचंद द्विवेदी और अनुपचंद दुबे का नाम शामिल है. विदित हो कि सूचक मझिआंव थाना के दलको गांव निवासी देवराज तिवारी के पुत्र सह मृतक ब्रजकिशोर तिवारी की 13 जून 2001 को सदर अस्पताल गढ़वा के पूर्वी गेट के पास पक्की सड़क पर गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. इस मामले में उपरोक्त तीनों लोगों को आरोपी बनाते हुए गढ़वा थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. प्राथमिकी में कहा गया था कि ब्रजकिशोर तिवारी आवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए गढ़वा आया था, उसी समय आरोपियों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी. ब्रजकिशोर के पिता देवराज तिवारी उस समय गढ़वा प्रखंड के दूबे मरहटिया में शिक्षक थे, जो गढ़वा ही रहते थे. जानकारी होने के बाद देवराज तिवारी ने मौके पर पहुंच कर सदर अस्पताल में अपने पुत्र की पहचान की तथा पुलिस को बयान दिया, जिसमें नरेंद्र पांडेय, सतीशचंद्र द्विवेदी और अनुपचंद्र दूबे को आरोपी बनाया था.
उनके बयान के आधार पर गढ़वा थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करते हुए इस मामले का अनुसंधान किया. अनुसंधान के बाद तथ्य के साथ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया. न्यायालय ने साक्षियों का बयान कलमबद्ध कर उपलब्ध दस्तावेज के आधार पर सभी अभियुक्तों को आजीवन कारवास की सजा सुनायी है. दस हजार रुपया जुर्माना नहीं देने की स्थिति में अभियुक्तों को छह माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी.

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