गुहार लगानेवालों में उग्रवादी हिंसा में मारे गये लोगों के परिजन हैं शामिल.
गढ़वा : जिला प्रशासन की ओर से जिलास्तरीय समस्या निवारण शिविर लगाया गया़ समाहरणालय स्थित प्रशिक्षण केंद्र भवन में आयोजित इस शिविर में उग्रवादी हिंसा में मारे गये लोगों के आश्रितों के दावे, सामाजिक सुरक्षा से जुड़े पेंशन तथा आपूर्ति विभाग की समस्याओं से संबंधित आवेदनों को लिया गया़ एक दिवसीय इस शिविर में उग्रवादी हिंसा में मारे गये 38 आश्रितों ने अनुग्रह, अनुदान व सरकारी सेवा में नियुक्ति से संबंधित दावे किये़
इस मौके पर बताया गया कि झारखंड राज्य गठन के बाद से जो लोग उग्रवादी हिंसा में मारे गये हैं, उनके आश्रितों से दावे प्राप्त किये जा रहे है़ं पहले से 70 लोगों की सूची बनायी गयी है़, जिसमें से 54 मामले का निष्पादन करते हुए उनके आश्रितों को नौकरी, मुआवजा व अन्य सरकार की ओर से अनुशंसित देय का भुगतान किया जा चुका है़
इस शिविर में साल 1989 में नक्सलियों के हाथों मारे गये डंडई के तसरार गांव निवासी बांके बिहारी सिंह उनके बड़े भाई राधेश्याम सिंह के आश्रितों ने भी मुआवजा व नौकरी की गुहार लगायी़ मृतक बांके बिहारी सिंह के पुत्र प्रभाकर सिंह ने बताया कि गढ़वा जिले में घटित पहली नक्सली घटना में उनके पिता व चाचा की हत्या की गयी थी़ उस समय वे काफी छोटे थे़ युवा होने के बाद से वे मुआवाजे के लिए भागदौड़ कर रहे हैं. लेकिन उन्हें अभी तक न्याय नहीं मिल सका है़
आपूर्ति से संबंधित 22 मामले पहुंचे : शिविर में इसके अलावे भी अन्य लोगों ने दावे से सबंधित अपने आवेदन जमा किये़ इसी तरह आपूर्ति विभाग की समस्याओं से जुड़े शिविर में खाद्य सुरक्षा अधिनियम की समस्या से संबंधित 22 आवेदन पत्र जमा हुए. खाद्य सुरक्षा अधिनियम से संबंधित जिन समस्याओं के आवेदन प्राप्त हुए, उनमें से आधार कार्ड से लिंकअप नहीं होने, सफेद राशन कार्ड बनवाने तथा परिवार के सदस्यों की अतिरिक्त संख्या जोड़वाने आदि शामिल है़ इस मौके पर एसडीओ राकेश कुमार, सामान्य शाखा प्रभारी लक्ष्मीनारायण किशोर सहित अन्य लोग उपस्थित थे़
