फ्लोरोसिस की बीमारी से जूझ रहे गांव के मामले में हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान
गढ़वा : रोसिस की बीमारी से जूझ रहे गढ़वा प्रखंड के प्रतापपुर गांव की समस्या पर झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा संज्ञान लेकर गढ़वा पीडीजे से इसकी जांच कराने व राज्य के दो विभागों के मुख्य सचिवों को तलब करने के बाद सरकार में जो हड़कंप मची है, उससे यह उम्मीद बनती दिख रही है कि प्रतापपुरवासियों का दुख शायद जल्द दूर हो जायेगी.
वैसे तो करीब 5000 की आबादी वाला यह पूरा प्रतापपुर पंचायत ही फ्लोराइड से प्रभावित है. लेकिन इस गांव के मौनाहा टोला की पिछले करीब दो दशक से जो दयनीय स्थिति बनी हुई है, वह किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के लिए सवाल खड़ा करता है, जहां सरकार इस समय अच्छे दिन का ढिंढोरा पीटते चल रही है. जनता के बीच अपने उपलब्धि को बताने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहां एक गांव के लोगों को दो दशक से शुद्ध पानी के लिए तड़पना सरकार की पोल को खोल कर रख देती है.
अब जब इस मामले में उच्च न्यायालय ने संज्ञान लिया है, तो लोगों को यह आशा जग गयी है कि अब उनकी समस्या का कोई स्थायी हल निकलकर रहेगा. शनिवार को उच्च न्यायालय के निर्देश पर गढ़वा के प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश पीके श्रीवास्तव जब प्रतापपुर गांव पहुंचे, जो वहां लोगों की आकांक्षाएं देखते ही बन रही थी. जांच करने गये पीडीजे के समक्ष लोगों ने अपनी समस्याओं की झड़ी लगा दी.
लोगों में सरकार और जनप्रतिनिधियों के प्रति गहरा आक्रोश था. सबसे अधिक गांव के लोगों को इस बात के लिए रोष था कि जब कोई बड़ा अधिकारी अथवा टीम उनके गांव पहुंचना होता है, तो पेयजल व स्वच्छता विभाग उनके बीच ऐनकेन प्रकारेण कुछ समय के लिए पेयजलापूर्ति शुरू कर देता है और जैसे ही मामला शांत हो जाता है, फिर उनकी स्थिति ज्यों की त्यों हो जाती है.
