गढ़वा : गढ़वा शिक्षा अधीक्षक कार्यालय में एक लिपिक लगातार 17 साल से जमे हुए हैं. वह भी प्रतिनयोजन पर. इन्हें दो बार निलंबित किया जा चुका है. दो बार इन पर प्रपत्र (क) का गठन हो चुका है.
इनका प्रतिनियोजन रद्द करके विरमित करने के भी निर्देश जारी हो चुके हैं. लेकिन, जिला शिक्षा अधीक्षक कहते हैं कि कोई योग्य लिपिक नहीं होने की वजह से उन्हें विरमित नहीं किया जा रहा है. दो माह पूर्व शिक्षक नियुक्ति एवं स्थानांतरण मामले में विवादों में आने के बाद उपायुक्त के निर्देश पर आरडीडीइ ने उसके प्रतिनियोजन को रद्द कर दिया था़
सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार उपाध्याय को सूचना का अधिकार कानून (आरटीआइ) के तहत मिली जानकारी में इस तथ्य का खुलासा हुआ है. 17 साल के दौरान ओमप्रकाश को विभिन्न आरोपों के बाद पहली बार आरडीडीइ पलामू ने छह दिसंबर, 2005 को निलंबित किया था. छह दिसंबर, 2005 को प्रपत्र (क) भी गठित किया गया था़ दूसरी बार आरडीडीइ के ज्ञापांक 673 दिनांक 23 जुलाई, 2014 को भी प्रपत्र (क) गठित करते हुए 21 जुलाई, 2014 को निलंबित कर दिया गया था.
अनुकंपा के आधार पर 14 दिसंबर, 1999 से शिक्षा विभाग में सेवा दे रहे ओमप्रकाश सिंह की नियुक्ति राजकीय उवि नेतरहाट के लिए हुई थी. लेकिन, शुरू के कुछ महीनों को छोड़ दें, तो ओमप्रकाश ने अपनी 17 साल की सेवा में यदा-कदा ही अपने मूल स्थान पर सेवा दी.
कई बार उनका प्रतिनियोजन रद्द किया गया, लेकिन उन्होंने कभी अपने मूल स्थान पर योगदान नहीं किया. मार्च, 2016 में आरडीडीइ रामयतन राम ने शिक्षा अधीक्षक कार्यालय के लिपिक मनोज मिश्रा एवं ओमप्रकाश सिंह का प्रतिनियोजन रद्द करते हुए उन्हें मूल स्थान में योगदान देने का निर्देश दिया. मनोज मिश्रा ने रेहला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में योगदान दिया, लेकिन ओमप्रकाश ने अब तक अपने मूल कर्तव्य स्थान राजकीय उच्च विद्यालय नेतरहाट में योगदान नहीं दिया. इसके पहले भी ओमप्रकाश का प्रतिनियोजन रद्द करते हुए उन्हें मूल स्थान पर जाने के निर्देश दिये गये थे, लेकिन उन्होंने योगदान नहीं दिया.
कर्मी का अभाव है : डीएसइ
जिला शिक्षा अधीक्षक बृजमोहन कुमार ने बताया कि उनके कार्यालय में एक योग्य लिपिक का अभाव है़ इस वजह से वे उनको विरमित नहीं कर रहे हैं. जैसे ही दूसरा लिपिक उन्हें मिलेगा, ओमप्रकाश को विरमित कर दिया जायेगा़
