जानवरों की जान पर आफत. वन विभाग को नहीं है जंगली जानवरों की परवाह
कुआं में कूदे जानवर का शव लेने नहीं आया विभाग
केतार(गढ़वा) : केतार प्रखंड में इन दिनों पेयजल का गंभीर संकट है. लगभग शत-प्रतिशत नदी, नाले व कृत्रिम जलस्रोत सूख चुके हैं. केतार की मुख्य पहाड़ी भगवान घाटी, नारायण वन, भैंसहट घाटी व राजघाटी के घने जंगलों की अंधाधुंध कटाई एवं अवैध उत्खनन की वजह से जंगल में रहनेवाले जानवर अब गांव की ओर रुख कर रहे हैं. गांव में भी इन्हें पानी नहीं मिल रहा है और प्यास से तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे हैं.
पहाड़ी से उतर कर प्रतिदिन सियार, भालू, वनसुअर, लकड़बग्घा व अन्य जानवर पानी की खोज में केतार प्रखंड के गांवों में पहुंच रहे हैं. बुधवार को पानी की खोज में जंगल से आये लकड़बग्घा की मौत के बाद भी वन विभाग या अन्य सरकारी स्तर पर उसकी खोजबीन करने कोई नहीं पहुंचा है. ग्रामीण शुरू में इसे तेंदुआ बता रहे थे. लेकिन, गांव के जानकार लोग इसकी पहचान लकड़बग्घा के रूप में कर रहे हैं. हालांकि, वन विभाग की ओर से अब तक कोई इस जानवर का शव लेने नहीं आया है.
जानवर के शव को गांव के बाहर फेंका : ग्रामीणों ने जानवर के शव को कुआं से निकाल कर गांव से दूर फेंक दिया है. कई गांव में वन सुरक्षा समिति है, लेकिन इस मामले में समिति ने भी अब तक कोई कदम नहीं उठाया है. न जानवरों को बचाने की दिशा में, न वन की कटाई रोकने और जंगल को बचाने की दिशा में. ज्ञात हो कि नियम के मुताबिक, वन विभाग को इस जानवर के शव को ले जाकर इसका पोस्टमार्टम कराना चाहिए था.
