फोन से बात करने के लिए जाना पड़ता है 15 किमी दूर

50 हजार की आबादीवाले केतार प्रखंड में कोई भी संचार व्यवस्था नहीं है. पंचायत को इंटरनेट से जोड़ने की प्रधानमंत्री के घोषणा के बाद यहां के लोगाों में उम्मीद जगी थी, लेकिन वह पूरी नहीं हो सकी. अब भी यहां के लोग सरकार की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं कि कब उनके […]

50 हजार की आबादीवाले केतार प्रखंड में कोई भी संचार व्यवस्था नहीं है. पंचायत को इंटरनेट से जोड़ने की प्रधानमंत्री के घोषणा के बाद यहां के लोगाों में उम्मीद जगी थी, लेकिन वह पूरी नहीं हो सकी. अब भी यहां के लोग सरकार की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं कि कब उनके दिन बहुरेंगे.
गढ़वा/केतार : दो प्रदेश की सीमाओं से लगा पांच-छह वर्ष पूर्व अस्तित्व में आया जिले का नया प्रखंड केतार में किसी भी तरह की संचार व्यवस्था नहीं होने के कारण 50 हजार की आबादी देश-दुनिया से पूरी तरह कटे हुए हैं.
इस प्रखंड में संचार व्यवस्था नहीं होने के कारण प्रखंड के किसान, छात्र, पदाधिकारी एवं ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. एक तरफ प्रधानमंत्री देश के सभी पंचायतों को वाई-फाई से कनेक्ट करने व गांव में इंटरनेट सुविधा बहाल करने की घोषणा को अमली-जामा पहनाने में लगे हुए हैं. केतार प्रखंड में किसी भी मोबाइल कंपनी का टावर नहीं है. कुछ निजी कंपनी के लगे भी थे, तो वे काम नहीं करते.
पहले समीपवर्ती उतर प्रदेश व बिहार की सीमाओं से लगे कुछ गांव के लोग पहले बिहार एवं यूपी के सिम से मोबाइल पर बात कर लेते,लेकिन अब वह भी नहीं हो पाता. प्रखंड के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी नहीं हो पाती.
इसके लिए उन्हें भवनाथपुर केतार मार्ग में असनाबांध पहाड़ पर आकर लैपटॉप से जानकारी इकठ्ठा करनी पड़ती है. अथवा मोबाइल से बात करने के लिए 15 किमी भवनाथपुर प्रखंड मुख्यालय आना पड़ता है. मेक इन इंडिया में यह प्रखंड आज भी देश-दुनिया से कटा हुआ है. 50 हजार की आबादी वाले इस प्रखंड के लोगों को अपने परिजनों से हालचाल अथवा दुख-दर्द बांटने के लिए मोबाइल से बात करने के लिए 15 किमी दूर आना पड़ता है. इससे बड़ी विडंबना ओर क्या हो सकती है कि आजादी के बाद भी इतनी बड़ी आबादी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं.
गुहार लगा कर थक चुके हैं लोग
ऐसा नहीं है कि इन सुविधाओं के लिए लोगों ने सरकार से मांग नहीं की है. प्रखंड के लोग पिछले दो-तीन वर्षों से केंद्रीय संचार मंत्री, सांसद , विधायक व जिले के आला अधिकारियों से पत्राचार कर गुहार लगा चुके हैं,लेकिन किसी ने इसकी सुध नहीं ली है.
मोदी के प्रधानमंत्री बनने और उनके द्वारा गांव को इंटरनेट से जोड़ने की घोषणा के बाद यहां के लोगों में एक उम्मीद जगी थी,लेकिन वह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी और आज भी लोगों को इस बात का इंतजार है कि कब वे अपने घर बैठे संचार व्यवस्था का लाभ उठा पायेंगे या यूं ही उम्मीदों पर जीवन काट रहे वे इस दुनिया को अलविदा कह देंगे.

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