नक्सलियों का सेफ जोन है गोबरदाहा संदर्भ : टीपीसी व पुलिस के बीच मुठभेड़रमकंडा(गढ़वा): भगौलिक दृष्टिकोण से सुदूर व जंगलों से घिरा होने के कारण गोबरदाहा शुरू से नक्सलियों के लिए सेफ जोन बना हुआ है. रमकंडा थाना क्षेत्र अंतर्गत यह गांव चारों ओर जंगलों से घिरा हुआ है. इससे पूर्व दो अप्रैल को भी पुलिस ने टीपीसी को यहां घेरने का प्रयास किया था, लेकिन उस समय भी पुलिस को नजदीक देख टीपीसी के सभी नक्सली अपना गोली, वरदी सहित काफी सामान छोड़ कर भाग निकले थे. इससे पहले वर्ष 2014 के अगस्त महीने में इसी गांव में टीपीसी के दो गुटों के बीच घंटों मुठभेड़ हुई थी. इसमें अर्जुनजी व रोशनजी का दस्ता था. दोनों टीपीसी के नाम से ही संगठन चला रहे थे. लेकिन मतभेद के कारण दोनों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था. बुधवार को भोर में पहुंचे थे नक्सलीगोबरदाहा गांव में बुधवार को टीपीसी का एरिया कमांडर अर्जुनजी एवं नितांतजी का दस्ता सुबह करीब पांच बजे सूर्योदय के पूर्व ही पहुंचा था. दस्ता में करीब 15 की संख्या में सदस्य थे. यहां पहुंचने के बाद नक्सलियों ने सभी के लिए भोजन की व्यवस्था करने का फरमान ग्रामीणों को सुनाया था. करीब 10 बजे वे गांव के पास ही स्थित जमुनदाहा नदी के पास धूप में कुछ सदस्य आराम कर रहे थे, तो कुछ सदस्य नहा रहे थे. इसी बीच पुलिस को गांव में देखकर वे हकबक रह गये. इधर ग्रामीण भी अचानक गांव के पास गोलियों की तड़तड़ाहट सुनकर अवाक रह गये. गांव के लोग अक्सर नक्सलियों के यहां शरण लेते रहने के कारण हमेशा दहशत में रहते हैं. विशेषकर मुठभेड़ की स्थिति में ग्रामीण अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंतित रहते हैं कि कहीं मुठभेड़ के दौरान वे इसकी चपेट में न आ जायें.
नक्सलियों का सेफ जोन है गोबरदाहा
नक्सलियों का सेफ जोन है गोबरदाहा संदर्भ : टीपीसी व पुलिस के बीच मुठभेड़रमकंडा(गढ़वा): भगौलिक दृष्टिकोण से सुदूर व जंगलों से घिरा होने के कारण गोबरदाहा शुरू से नक्सलियों के लिए सेफ जोन बना हुआ है. रमकंडा थाना क्षेत्र अंतर्गत यह गांव चारों ओर जंगलों से घिरा हुआ है. इससे पूर्व दो अप्रैल को भी […]
