गढ़वा में प्रतिवर्ष 2400 यूनिट रक्त की जरूरत

गढ़वा में प्रतिवर्ष 2400 यूनिट रक्त की जरूरत वर्तमान में स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से 1400-1500 यूनिट रक्त ही उपलब्ध हो पा रहा है7जीडब्ल्यूपीएच2-गढ़वा ब्लड बैंक की तसवीर 7जीडब्ल्यूपीएच3-डोनर कोच के अभाव में इसी पर लेटकर रक्तदाता करते हैं रक्तदान 7जीडब्ल्यूपीएच4-दो साल से टूटा पड़ा डोनर कोच जितेंद्र सिंह गढ़वा. गढ़वा जिले में रक्त की […]

गढ़वा में प्रतिवर्ष 2400 यूनिट रक्त की जरूरत वर्तमान में स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से 1400-1500 यूनिट रक्त ही उपलब्ध हो पा रहा है7जीडब्ल्यूपीएच2-गढ़वा ब्लड बैंक की तसवीर 7जीडब्ल्यूपीएच3-डोनर कोच के अभाव में इसी पर लेटकर रक्तदाता करते हैं रक्तदान 7जीडब्ल्यूपीएच4-दो साल से टूटा पड़ा डोनर कोच जितेंद्र सिंह गढ़वा. गढ़वा जिले में रक्त की कमी को पूरा करने के लिए प्रतिवर्ष लगभग 2400 यूनिट रक्त की जरूरत है. वर्तमान में यहां 1400-1500 रक्त ही उपलब्ध हो पा रहा है. विभिन्न स्वयंसेवी संस्था एवं अन्य संस्थानों के द्वारा सालों भर रक्तदान शिविर एक अभियान की तरह चलाया जाता है. जिससे जिले में रक्त की कमी को पूरा किया जा सके. इस अभियान में सरकार का अथवा सरकार के किसी भी इकाई का कोई योगदान नहीं होता. लोगों की जागरूकता के कारण वर्तमान में रक्त उपलब्ध करा कर ब्लड बैंक के माध्यम से जरूरतमंदों के बीच वितरित किया जाता है. इससे जिले के लोगों को काफी हद तक रक्त के मामले में राहत मिलती है. बीते सात वर्षों में रक्तदान के प्रति लोगों के बीच जागरूकता में काफी वृद्धि हुई है. इसका प्रमुख कारण स्वयंसेवी संस्थाओं के द्वारा चलाया जानेवाला जागरूकता अभियान है. जिसके प्रतिफल सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में रक्त संग्रह किया जाता है. वर्ष 2008 में खुला था ब्लड बैंकगढ़वा जिले में रक्त की कमी को दूर करने के उद्देश्य से वर्ष 2008 में झारखंड राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी द्वारा संचालित ब्लड बैंक की स्थापना तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री भानु प्रताप शाही के द्वारा किया गया था. इसके पूर्व रक्त के लिए लोगों को दूसरे शहर में जाना पड़ता था. जिसके कारण लोगों को जान तक गंवानी पड़ती थी. ब्लड बैंक की स्थापना के बाद बड़ी समस्या रक्त संग्रह करने की उत्पन्न हुई. लोगों में जागरूकता की कमी के कारण ब्लड बैंक में रक्त संग्रह जरूरत के अनुसार नहीं हो पाता था. लेकिन धीरे-धीरे समय बीता और लोगों में रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ने लगी. इस जागरूकता को बढ़ाने में विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा. इसके कारण वर्तमान में जिले में रक्त की कमी को पूरा करने में सहूलियत हो रही है. वर्ष 2015 में 1468 यूनिट रक्त संग्रह हुआवर्ष 2015 में गढ़वा ब्लड बैंक में विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से आयोजित रक्तदान शिविर के माध्यम से जनवरी 2015 से छह दिसंबर 2015 तक कुल 1468 यूनिट रक्त का संग्र्रह किया गया. इनमें 1426 यूनिट रक्त जरूरतमंदों को उपलब्ध करायी गयी. जनवरी माह में 51 यूनिट रक्त संग्रह किया गया. जबकि खर्च 66 यूनिट हुआ. इसी तरह फरवरी उपलब्ध 126 यूनिट वितरण 88 यूनिट, मार्च में उपलब्ध 51 यूनिट वितरण 76 यूनिट, अप्रैल में उपलब्ध 71 यूनिट वितरण 89 यूनिट, मई में उपलब्ध 150 यूनिट वितरण 112 यूनिट, जून में उपलब्ध 132 यूनिट वितरण 144 यूनिट, जुलाई में उपलब्ध 153 यूनिट वितरण 148 यूनिट, अगस्त में उपलब्ध 137 यूनिट वितरण 152 यूनिट, सितंबर में उपलब्ध 205 यूनिट वितरण 188 यूनिट, अक्टूबर में उपलब्ध 252 यूनिट वितरण 183 यूनिट, नवंबर में उपलब्ध 116 यूनिट वितरण 152 यूनिट एवं दिसंबर 2015 में छह दिसंबर तक उपलब्ध 24 यूनिट तथा 28 यूनिट रक्त वितरित किया गया है.जिन्होंने रक्त उपलब्ध कराया वर्ष 2015 में रक्तदान शिविर का आयोजन कर रक्त उपलब्ध कराने में सराहनीय भूमिका निभानेवालों में लायंस क्लब ऑफ गढ़वा ग्रीन, लॉयंस क्लब ऑफ गढ़वा ऑसम, वनांचल एजुकेशनल एंड वेलफे यर ट्रस्ट फरठिया, पुलिस अधीक्षक गढ़वा, आईआरसीएस गढ़वा, नवजवान संघर्ष मोर्चा, सदाफल देव विहंगम योग समिति, सीआरपीएफ 172 बटालियन, संत निरंकारी समाज पलामू, लियो क्लब ऑफ गढ़वा रॉयल, आईएमए गढ़वा, केयर इंडिया सोसाइटी, पतंजलि योग समिति, महेंद्रा फाइनेंस, सरस्वती चिकित्सालय, एसके ऑयल इंडस्ट्री, श्री मंगलम एंड कंपनी, केसरी यंग स्टार, मेसर्स आरएन तिवारी एंड संस पेट्रोल पंप का नाम शामिल है. दो वर्ष से टूटा पड़ा है डोनर कोचब्लड बैंक में स्थापना काल के वक्त लाया गया ब्लड डोनर कोच दो साल पूर्व खराब हो गया था. जिसे नहीं बनाया जाने के कारण वह अब पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है. इसके कारण ब्लड बैंक में रक्तदाताओं को एक चौकीनुमा बेड में लेटकर रक्तदान करना पड़ता है. डोनर कोच सहित अन्य समस्याओ को लेकर कई बार रांची को लिखा गया, लेकिन न तो उसे बदला गया और न ही उस बारे में कोई जवाब मिला. सरकार कर्मियों की अनदेखी कर रही है: लैब तकनीशियनगढ़वा ब्लड बैंक में वर्ष 2008 से कार्यरत लैब तकनीशियन विनय सिंह ने बताया कि सरकार राज्य भर में कार्यरत लैब तकनीशियन के साथ बहाली प्रक्रिया में अनदेखी कर रही है. उन्होंने कहा कि यहां पर अनुबंध पर कार्य करने के दौरान ही उनका उम्र सरकार के निर्धारित मापदंड से ज्यादा हो गया है. ऐसे में उन्हें वंचित रखा जाना सरकार का रवैया अन्यायपूर्ण है. उन्होंने सरकार से अनुबंध पर कार्यरत लैब तकनीशियन जिनकी उम्र यहां कार्य करते ज्यादा हो गयी है, उनकी सेवा नियमित करने की मांग की है. अपने पास कोई फंड नहीं है: डॉ राम विनोद ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ राम विनोद ने कहा कि डोनर कोच दो साल से खराब है. इसे लेकर उन्होंने कई बार राज्य व स्थानीय स्तर पर अधिकारियों को पत्र लिखा. लेकिन कोई जवाब उन्हें अबतक नहीं मिला है. अपने पास कोई फंड नहीं है, जिससे डोनर कोच की मरम्मत करायी जा सके अथवा नयी लायी जा सके. उन्होंने कहा कि ब्लड बैंक प्रोसेसिंग चार्ज से मिलनेवाली राशि से चलता है. यह ब्लड बैंक सरकार द्वारा सृजित नहीं है. बल्कि सरकार की इकाई झारखंड एड्स कंट्रोल सोसाइटी के सहयोग से चलता है.

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