मोक्ष का सुलभ साधन है श्रीराम कथा : वश्विकांताचार्य

मोक्ष का सुलभ साधन है श्रीराम कथा : विश्वकांताचार्य 16जीडब्ल्यूपीएच3-प्रवचन करते विश्वाकांताचार्य गढ़वा. हमसभी के पास समय कम है और साधन अनेक हैं. इन सभी का अगर कोई सार है, तो वह है तुलसीदास द्वारा रचित श्रीराम कथा. उक्त बातें चिनिया रोड स्थित मां दुर्गा पूजा समिति के पंडाल में प्रवचन करते हुए बनारस से […]

मोक्ष का सुलभ साधन है श्रीराम कथा : विश्वकांताचार्य 16जीडब्ल्यूपीएच3-प्रवचन करते विश्वाकांताचार्य गढ़वा. हमसभी के पास समय कम है और साधन अनेक हैं. इन सभी का अगर कोई सार है, तो वह है तुलसीदास द्वारा रचित श्रीराम कथा. उक्त बातें चिनिया रोड स्थित मां दुर्गा पूजा समिति के पंडाल में प्रवचन करते हुए बनारस से आये विश्वकांताचार्य ने कही. उन्होंने कहा कि संसार के साधानों का प्रयोग गुरुओं व ज्ञानियों के आज्ञानुसार करना चाहिए. इनके आज्ञानुल्लंघन से कभी-कभी हमारा अनर्थ भी हो सकता है. उन्होंने कहा कि मां सती अपने पिता के घर में हो रहे यज्ञानुष्ठान में जाने को तबतक उद्दत होती है, जब कोई निमंत्रण नहीं आया होता है. कल्याण के देवता शिव से जाने के लिए पूछने पर भोलेनाथ मां सती को कहते हैं कि पिता के घर मृत्यु होने पर अग्नि आदि दुर्घटना में किसी भी विषम परिस्थिति में ऐसे ही बिना बुलाये जाया जा सकता है. परंतु यदि कोई यज्ञ, अनुष्ठान, विवाह या शुभ कार्य हो तो बिन बुलाये नहीं जाना चाहिए. यह शास्त्रों का मत है. भगवान शिव के मना करने के बावजूद सती यज्ञ में चली जाती हैं. परिणामस्वरूप मां सती का देहावसान हो जाता है. उन्होंने कहा कि कथन का तात्पर्य है कि रामकथा सुगम मार्ग का पता तो बताती है, परंतु चयन हमें करना है कि करना क्या है. साथ ही रामजन्म के संपूर्ण कारणों व नारद मोह, नारद श्राप, प्रताप भानु की कथा तथा मनु सतरूपा, केवर प्राप्ति की कथा भी उन्होंने सुनायी.

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