...श्रीराम का चरत्रि अनुकरणीय : रत्नेश

…श्रीराम का चरित्र अनुकरणीय : रत्नेशफोटो – मानस प्रवचन का उदघाटन करते एसडीपीअो व पूर्व विधायक.नगरऊंटारी (गढ़वा). ‘मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन मानव के लिए अनुकरणीय है. उनका पूरा जीवन त्रासदीपूर्ण रहा, लेकिन इसके बावजूद लोग राम की पूजा करते हैं. भारतीय मानस में राम का महत्व इसिलए नहीं है कि उन्हें काफी कठिनाइयों का […]

…श्रीराम का चरित्र अनुकरणीय : रत्नेशफोटो – मानस प्रवचन का उदघाटन करते एसडीपीअो व पूर्व विधायक.नगरऊंटारी (गढ़वा). ‘मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन मानव के लिए अनुकरणीय है. उनका पूरा जीवन त्रासदीपूर्ण रहा, लेकिन इसके बावजूद लोग राम की पूजा करते हैं. भारतीय मानस में राम का महत्व इसिलए नहीं है कि उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा बल्कि उनका महत्व इसिलए है कि उन्होंने तमाम कठिनाइयों को शिष्टतापूर्वक झेला. मुश्किल के क्षणों में भी श्रीराम ने धैर्य नहीं खोया तथा स्वयं को गरिमापूर्ण बनाये रखा.’उक्त बातें अयोध्या से पधारे कथा भास्कर आचार्य रत्नेश जी ने प्राथमिक विद्यालय के प्रांगण में नवयुवक क्लब पाल्हेकलां के प्रांगण में नवयुवक क्लब पाल्हे-यतपुरा के तत्वावधान में आयोजित मानसकथा के दौरान कही. उन्होंने कहा कि श्रीराम का चरित्र प्रेरणा लेने के लिए है कि मुश्किल के क्षणों में हम अपने को संयमित व नियंत्रित कैसे रखे. मानस रत्न अशोक दास ने कहा कि संसार को जानना ज्ञान है तथा ईश्वर को जानना विज्ञान है. श्रीहनुमान जी ज्ञानी नहीं विज्ञानी थे. उन्होंने श्रीराम को तत्क्षण पहचान लिया कि वे भगवान हैं. प्रवचन में उपस्थित श्रद्धालुअों में संघ के अध्यक्ष डॉ शशिकांत शुक्ल, अखिलेश शुक्ल, प्रदीप शुक्ल, शिवनारायण चौबे, दिनेश्वर चौबले, मुखिया मथुरा राम, इंद्रमणि शुक्ल, शैलेश शुक्ल, रोहित शुक्ल सहित बड़ी संख्या में श्रोतागण उपस्थित थे.

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