मान्यता के प्रति उदासीन है निजी विद्यालय

मामला शिक्षा का अधिकार कानून के विद्यालयों को मान्यता देने कागढ़वा. शिक्षा का अधिकार कानून से जुड़ने को लेकर निजी विद्यालयों में अभी भी सक्रियता नहीं देखी जा रही है. करीब एक माह पूर्व तत्कालीन उपायुक्त राजेश्वरी बी ने निजी विद्यालय के प्राचार्यों व शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की थी, जिसमें उन्होंने […]

मामला शिक्षा का अधिकार कानून के विद्यालयों को मान्यता देने कागढ़वा. शिक्षा का अधिकार कानून से जुड़ने को लेकर निजी विद्यालयों में अभी भी सक्रियता नहीं देखी जा रही है. करीब एक माह पूर्व तत्कालीन उपायुक्त राजेश्वरी बी ने निजी विद्यालय के प्राचार्यों व शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की थी, जिसमें उन्होंने सभी विद्यालय से अनिवार्य रूप से एक सप्ताह के अंदर शिक्षा का अधिकार कानून के तहत आवेदन कर शिक्षा विभाग से मान्यता लेने के निर्देश दिये थे. जिसका सबों ने स्वागत किया था. लेकिन उपायुक्त श्रीमती बी के स्थानांतरण के बाद से न तो शिक्षा विभाग इस मामले में गंभीर दिख रहा है और न ही विद्यालय प्रबंधन. सिर्फ छह विद्यालयों ने आवेदन दियाहाल यह है कि एक माह बीतने के बाद भी सिर्फ छह विद्यालयों ने ही मान्यता लेने के लिए आवेदन किया है. वहीं गढ़वा जिले मंे निजी विद्यालयों की संख्या 200 के करीब हैं. पूर्व में इनमें से सिर्फ 10 विद्यालयों को मान्यता मिल सकी है. जबकि करीब पांच विद्यालयों के आवेदन आने के बाद उनकी जांच प्रक्रिया चल रही है. विद्यालयों में संसाधनों का अभाव हैबताया जाता है कि अधिकांश विद्यालय जैसे-तैसे संचालित हो रहे हैं. उनके पास नियमानुसार संसाधानों व शिक्षकों का अभाव है. इस वजह से उनकी ओर से मान्यता लेने की दिशा में प्रयास नहीं किया जा रहा है.

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