गढ़वा से अविनाश की रिपोर्ट
Garhwa News: गढ़वा शहर की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर ‘सरस्वतिया नदी’ के अस्तित्व को बचाने के लिए अब प्रशासनिक तंत्र और आम जनता एक मंच पर आ गए हैं. अनुमंडल कार्यालय सभागार में सदर एसडीएम संजय कुमार की अनूठी पहल “कॉफी विद एसडीएम” के तहत आयोजित विशेष संवाद में सरस्वतिया नदी के जीर्णोद्धार, स्वच्छता और इसे अतिक्रमण मुक्त बनाने को लेकर एक ठोस ब्लूप्रिंट तैयार किया गया. इस साप्ताहिक संवाद कार्यक्रम में शहर के दो दर्जन से अधिक पर्यावरण प्रेमियों, साहित्यकारों, चिकित्सकों और जागरूक नागरिकों ने हिस्सा लिया.
अभियान को युद्ध स्तर पर चलाने की अपील
एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि सरस्वतिया नदी गढ़वा वासियों की साझा विरासत है और इसका संरक्षण सिर्फ सरकारी तंत्र नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है. संवाद के दौरान पर्यावरण परिवार के अध्यक्ष और साहित्यकार विनोद पाठक ने चेताया कि “आपन सरस्वतिया अभियान” को युद्ध स्तर पर जारी रखना होगा. उन्होंने व्यावहारिक सुझाव देते हुए कहा कि नदी को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग टोलियों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जाए. उन्होंने कहा कि नदी बचाने के लिए आस्तिक और नास्तिक दोनों को आगे आना होगा और बेहतर काम करने वालों को प्रशासनिक स्तर पर सम्मानित किया जाना चाहिए. गढ़वा के चिकित्सक डॉ टी पीयूष ने सामाजिक सहभागिता पर जोर देते हुए कहा कि प्रशासन अकेले इस अभियान को सफल नहीं बना सकता. उन्होंने एक अनोखा फॉर्मूला देते हुए कहा कि जो लोग सबसे अधिक गंदगी फैलाते हैं, उन्हीं को मोहल्ले में नदी स्वच्छता का जिम्मा देकर ‘चौकीदार’ बना दीजिए. इसके अलावा उन्होंने प्रभात फेरी निकालने और नदी के संवेदनशील किनारों पर लोहे की जालियां लगाने का भी सुझाव दिया.
वार्ड पार्षद ने लिया निगरानी का जिम्मा
संवाद के दौरान नगर परिषद वार्ड संख्या 7 के पार्षद विनोद प्रसाद ने मिसाल पेश करते हुए शमीम टेलर से लेकर जोड़ा पुल तक के नदी क्षेत्र की स्वच्छता और निगरानी का जिम्मा खुद अपनी टीम के साथ लेने की घोषणा की. वहीं, इस गंभीर विमर्श के बीच नवोदित कवयित्री संध्या सुमन ने अपनी कविता के माध्यम से सरस्वतिया नदी की वर्तमान पीड़ा को बयां किया, जिसने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया. कार्यक्रम के अंत में एसडीएम संजय कुमार की मौजूदगी में सभी उपस्थित नागरिकों ने एक सुर में संकल्प लिया कि जब तक सरस्वतिया नदी अपने पुराने स्वरूप में पुनर्जीवित नहीं हो जाती, तब तक यह जन-अभियान जारी रहेगा.
नदी को बचाने के लिए प्रबुद्ध जनों के 7 बड़े सुझाव
पिलर गाड़कर सीमांकन (धीरेंद्र द्विवेदी):- नदी के किनारों पर पिलर लगाए जाएं जिससे कि सीमा तय रहे और भविष्य में कोई अतिक्रमण न कर सके.
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और श्रमदान (विनोद जायसवाल):- नदी में बढ़ रहे कीचड़ को साफ करने के लिए छोटे सीवेज प्लांट लगें और हर रविवार सामाजिक संस्थाएं सामूहिक श्रमदान करें.
अतिक्रमण और कचरा प्रबंधन (जगतारण तिवारी व एडवोकेट राजीव रंजन):- नदी के दोनों किनारों पर सघन वृक्षारोपण हो और नगर परिषद कचरा उठाव व्यवस्था दुरुस्त करे जिससे कि लोग नदी में कचरा न फेंकें.
प्लास्टिक और कचरा निस्तारण (चंदन जायसवाल):- सुखवाना स्थित कचरा निस्तारण प्लांट को तुरंत चालू किया जाए. युवा समाजसेवी चंदन ने इस अभियान के लिए अपनी तरफ से डीजल का खर्च वहन करने की भी घोषणा की.
मांस-मछली फेंकने वालों पर कार्रवाई (दयाशंकर गुप्ता):- नदी में मांस-मछली के अवशेष फेंककर प्रदूषण फैलाने वालों को चिन्हित कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए.
जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही (नीरज श्रीधर):- शहरी क्षेत्र में वार्ड पार्षदों और ग्रामीण क्षेत्रों में मुखियाओं की भूमिका और जवाबदेही तय की जाए.
गाद की सफाई (धर्मनाथ झा व नितिन तिवारी): -नदी की गाद हटाकर सोलिंग कराई जाए और मेराल क्षेत्र में भी सरस्वतिया नदी को लेकर स्वच्छता अभियान चलाया जाए.
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