पलामू से चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट
पलामू: बाढ़ का पानी सिर्फ घर का सामान ही नहीं बहाता, कई बार बच्चों के सपने और उनकी पढ़ाई भी उसके साथ बह जाती है. पलामू में बुधवार को कुछ ऐसा ही दर्द देखने को मिला. पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली नन्हीं कृतिका कुमारी की किताबें, कॉपियां, स्कूल बैग और पढ़ाई का जरूरी सामान बाढ़ के पानी में बह गया. घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि परिवार दोबारा सारा सामान खरीद सके.
पढ़ाई रुकने के डर से कृतिका अपनी मां के साथ सीधे जिले के DC दिलीप प्रताप सिंह शेखावत के पास पहुंच गयी. जन समाधान दिवस में जब मासूम बच्ची ने अपनी परेशानी सुनायी, तो वहां मौजूद लोगों की निगाहें भी उस पर टिक गयीं. कृतिका की फरियाद सुनने के बाद डीसी ने भी मामले को महज एक शिकायत की तरह नहीं लिया, बल्कि तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया.
कोयल नदी के उफान ने छीन लिया पढ़ाई का सामान
मेदिनीनगर नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर-2 स्थित बैंक कॉलोनी के समीप रहने वाली कृतिका कुमारी कक्षा पांच की छात्रा है. पिछले दिनों हुई मूसलाधार बारिश के बाद कोयल नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था. इसके बाद इलाके में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गयी.
बाढ़ का पानी कृतिका के घर में भी घुस गया. देखते ही देखते घर में रखा राशन और अन्य सामान पानी की चपेट में आ गया. इसी दौरान कृतिका का स्कूल बैग, किताबें, कॉपियां, यूनिफॉर्म और पढ़ाई से जुड़ा जरूरी सामान भी या तो पानी के तेज बहाव में बह गया या कीचड़युक्त पानी में पूरी तरह खराब हो गया.
‘मुझे फिर से स्कूल जाना है...’, मासूम की फरियाद सुन भावुक हुआ माहौल
पढ़ाई का सामान नष्ट होने के बाद कृतिका के सामने सबसे बड़ी चिंता यह थी कि अब वह स्कूल कैसे जायेगी. परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि बाढ़ की मार झेलने के बाद उसके लिए किताब-कॉपी और दूसरी जरूरी सामग्री दोबारा खरीदी जा सके.
इसी उम्मीद के साथ कृतिका अपनी मां के साथ जन समाधान दिवस पहुंची. उसने डीसी को अपनी परेशानी बतायी और पढ़ाई जारी रखने के लिए किताब-कॉपी समेत जरूरी शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने की गुहार लगायी.
मासूम की सबसे बड़ी चिंता यही थी कि उसकी पढ़ाई रुकनी नहीं चाहिए. वह अपने सहपाठियों के साथ दोबारा स्कूल जाना चाहती है और आगे पढ़कर समाज के लिए कुछ करना चाहती है.
बच्ची की फरियाद पर तुरंत हरकत में आया प्रशासन
कृतिका की बात सुनने के बाद डीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने मामले को गंभीरता से लिया. उन्होंने मौके पर मौजूद जिला शिक्षा पदाधिकारी को तत्काल बुलाया और बच्ची की मदद के लिए आवश्यक निर्देश दिए.
डीसी ने निर्देश दिया कि बच्ची की शिक्षा किसी भी परिस्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने 24 घंटे के भीतर उसके स्कूल और पाठ्यक्रम के अनुसार आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने को कहा.
इसके तहत बच्ची को टेक्स्ट बुक्स, कॉपियां, ज्योमेट्री बॉक्स, स्कूल बैग और स्टेशनरी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. साथ ही स्कूल प्रबंधन से समन्वय स्थापित कर बच्ची को हरसंभव सहयोग देने को कहा गया.
एक छोटी-सी फरियाद, लेकिन बड़ा संदेश
जन समाधान दिवस में आम तौर पर लोग जमीन, राशन, पेंशन और दूसरी प्रशासनिक समस्याएं लेकर पहुंचते हैं. लेकिन बुधवार को एक नन्हीं छात्रा अपनी पढ़ाई बचाने की उम्मीद लेकर डीसी के सामने पहुंची.
कृतिका की कहानी यह बताती है कि प्राकृतिक आपदा का असर सिर्फ घर और सामान तक सीमित नहीं रहता. गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों की पढ़ाई भी इससे प्रभावित होती है. ऐसे में प्रशासन की ओर से समय पर की गयी छोटी-सी मदद उनके भविष्य को पटरी पर लौटाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है.
डीसी की त्वरित पहल के बाद अब कृतिका की पढ़ाई दोबारा शुरू होने की उम्मीद जगी है. जिस बाढ़ ने उसकी किताबें और कॉपियां छीन ली थीं, उसी के बाद प्रशासन की संवेदनशीलता ने उसकी पढ़ाई जारी रखने की उम्मीद लौटा दी है.
