घाटशिला.
घाटशिला के लिए साल 2025 राजनीतिक रूप से बड़ा नुकसान वाला साबित हुआ. इस साल दो दिग्गज नेता रामदास सोरेन और बास्ता सोरेन को घाटशिलावासियों ने खो दिया. तीन बार के विधायक और दो बार मंत्री रहे रामदास सोरेन का निधन 15 अगस्त, 2025 को हो गया. वहीं, चंद माह पूर्व 4 जून 2025 को 1962 से 67 तक विधायक रहे सह सीपीआइ के दिग्गज नेता व पेसा कानून के जानकार सह आंदोलनकारी बास्ता सोरेन का निधन हो गया. इनकी समाज और राजनीति में गहरी पैठ थी. रामदास सोरेन ने 62 साल के उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया, जबकि बास्ता सोरेन 93 साल की उम्र में दुनिया छोड़ गये. दोनों जमीनी नेता थे. रामदास सोरेन 1980 से 44 साल के राजनीतिक जीवन में ग्राम प्रधान से लेकर मंत्री पद तक का सफर तय किया. 2009 में पहली बार झामुमो के टिकट से घाटशिला के विधायक बने. वर्ष 2014 में हार मिली. वहीं, 2019 व 2024 में जीते. उनका शव दिल्ली से सीधे 16 अगस्त 2025 को घाटशिला पहुंचा. लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. हर कोई फफक कर रो पड़ा. रामदास दा और बास्ता बाबू बनना आसान नहीं है. दोनों के चले जाने से राजनीतिक शून्यता जरूर आयी है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
