घाटशिला. चेंगजोड़ा स्थित अनुसूचित जनजाति आवासीय उच्च विद्यालय वर्ष 2026 में 248 की जगह 400 विद्यार्थियों की क्षमता वाला हो जायेगा. प्रस्तावित 148 छात्रों की बढ़ोतरी से प्रबंधन और शिक्षकों में चिंता बढ़ गयी है, क्योंकि बुनियादी सुविधाएं व मानव संसाधन उस अनुपात में उपलब्ध नहीं हैं. विद्यालय में 2005-06 में निर्मित 50 बेड का छात्रावास आज तक हैंडओवर नहीं हुआ है. दो दशक बाद भी यह जर्जर अवस्था में है, कई स्थानों पर टूटे-फूटे हुए है और अब पुन: मरम्मत जरूरी है. यहां कक्षा 1 से 10 तक आदिवासी व आदिम जनजाति समुदाय के बच्चे रहकर पढ़ाई करते हैं. विद्यालय का निर्माण 20 अप्रैल 1984 में हुआ था. बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रशेखर सिंह ने इसका उद्घाटन किया था, लेकिन मूलभूत समस्याएं आज भी बरकरार हैं. प्राचार्य ने बताया, बिना सुधार के बढ़ती संख्या से शिक्षा प्रभावित होगी. जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गयी है.
50 बेड वाला छात्रावास 20 साल बाद भी उपेक्षित:
विद्यालय में कुल 16 स्वीकृत शिक्षक हैं, जिनमें से केवल पांच शिक्षक सरकारी हैं, जबकि छह शिक्षक घंटी आधारित रूप में कार्यरत हैं. लिपिक का एक पद स्वीकृत है, लेकिन अब तक नियुक्ति नहीं हुई है. चपरासी के तीनों पद भरे हुए हैं, परंतु आवासीय विद्यालय होने के बावजूद रात्रि प्रहरी का कोई पद स्वीकृत नहीं है. शैक्षणिक दृष्टि से भी विद्यालय में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, संथाली और कंप्यूटर जैसे महत्वपूर्ण विषयों के लिए शिक्षकों की भारी कमी है. कई बार विभागीय अधिकारियों और जिला उपायुक्त द्वारा विद्यालय का निरीक्षण किया गया तथा कुछ भवनों की मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है, लेकिन 50 बेड वाला छात्रावास अब भी उपेक्षित है.– इस आवासीय विद्यालय की समस्याओं से जिला कल्याण विभाग और संबंधित पदाधिकारियों को लगातार लिखित रूप से अवगत कराया जा रहा है. विद्यालय प्रबंधन समिति को भी इस संबंध में लिखित रूप से अवगत करा चुके है. देखा जाय क्या होता है.
