वर्षों से वेतन भुगतान की समस्या से जूझ रहे शिक्षकों ने भाजपा नेत्री सुनीता देवदूत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास से मुलाकात की. मौके पर लंबित वेतन, सेवा-सुरक्षा, सम्मानजनक जीवन आदि मुद्दों को लेकर चर्चा हुई. प्रतिनिधिमंडल ने श्री दास को अवगत कराया कि राज्य के कई गैर-सरकारी सहायता प्राप्त व प्रबंधकीय स्कूलों में कार्यरत सैकड़ों शिक्षक और कर्मी पिछले 15 से 20 वर्षों से नियमित वेतन से वंचित हैं. आर्थिक तंगी के कारण शिक्षकों के परिवारों की स्थिति दयनीय है. बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, विवाह और दैनिक जरूरत प्रभावित हो रही है. इसके बावजूद शिक्षक शिक्षा व्यवस्था को जीवित रखने के लिये निरंतर सेवा दे रहे हैं. डॉ सुनीता देवदत्त सोरेन ने कहा कि शिक्षक समाज का स्तंभ होता है, लेकिन आज वे अपने हक के लिए दर-दर भटकने को विवश है. उन्होंने कहा कि वेतन कोई भीख नहीं, बल्कि शिक्षकों का संवैधानिक अधिकार है. मौके पर श्री दास ने शिक्षकों की बातों को गंभीरता से सुना. कहा कि शिक्षा और शिक्षक किसी भी समाज की रीढ़ हैं. शिक्षकों के साथ हो रहा अन्याय चिंताजनक है. उन्होंने आश्वासन दिया कि वे इस विषय को उचित मंच पर उठाएंगे और सरकार पर नैतिक दबाव बनाने का प्रयास करेंगे, ताकि उनका लंबित वेतन मिल सके.
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