एनजीटी की रोक के बाद खनन बंद, बिना मापी के 5 लाख सीएफटी बालू स्टॉक किया

जिले के इकलौते गुड़ाबांदा बालू घाट को सात साल के लंबे इंतजार के बाद मिली थी लीज

गुड़ाबांदा.

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की रोक के बाद 10 जून से सुवर्णरेखा नदी घाट से बालू का खनन पूरी तरह बंद हो गया है. पूर्वी सिंहभूम जिले के इकलौते गुड़ाबांदा बालू घाट को करीब सात साल के लंबे इंतजार के बाद लीज मिली थी. पर हैरान करने वाली बात यह है कि घाट का सीमांकन किए बिना ही पहले नियम के खिलाफ खनन किया गया, और अब स्टॉक प्वाइंट की एरिया मापी के बिना ही लाखों सीएफटी बालू स्टॉक कर लिया गया है.

31 मई को ग्राम प्रधान द्वारा घाट के उद्घाटन के बाद विधायक समीर मोहंती और फिर सांसद प्रतिनिधि ने भी इसका उद्घाटन किया था. इसके बाद 1 से 5 जून तक प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करने में समय बीता. महज पांच दिनों के भीतर लीज धारक कंपनी ने 5 लाख सीएफटी बालू का खनन कर स्टॉक कर लिया, जबकि उनका कुल लक्ष्य 7 लाख सीएफटी स्टॉक करने का था. लीज धारक कंपनी ””गोदावरी कोमडिटी प्रालि”” के प्रतिनिधि जितेंद्र कुमार ने बताया कि उन्हें एक ही घाट में दो अलग-अलग स्थानों से बालू खनन और परिवहन की अनुमति मिली है. इसके तहत गुड़ाबांदा की बनमाकड़ी पंचायत अंतर्गत कोरिया मोहनपाल बालू घाट में 34.70 हेक्टेयर तथा दूसरे घाट में 46.30 हेक्टेयर क्षेत्र में वैध उठाव चालान के साथ काम किया गया है. बुधवार से एनजीटी की रोक लागू होने के कारण खनन कार्य पूरी तरह रोक दिया गया है.

स्टॉक प्वाइंट से कितने में बिकेगा इसका रेट तय नहीं हुआ :

नदी घाट से वैध तरीके से ट्रैक्टर के जरिए स्टॉक प्वाइंट तक बालू लाने के लिए कंपनी द्वारा 700 रुपये का रेट तय किया गया था. अब जब खनन बंद हो चुका है और बालू केवल स्टॉक प्वाइंट से बिकेगा, तब इसका रेट क्या होगा, यह अभी तक कंपनी और संबंधित विभाग ने तय नहीं किया है. ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि घाट में जो बालू का खनन हुआ वे कितना एरिया तक होना है, कितने एरिया में करना है, कितने एरिया प्रखंड क्षेत्र के अधीन आता है इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गयी है और खनन कर लिया गया. ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इधर कंपनी द्वारा जो स्टॉक प्वाइंट लिया गया है इसका कितना एरिया है, कितना तक स्टॉक करना है.

बाहरी लोगों को काम पर लगाने से स्थानीय नाराज

लीज धारक कंपनी द्वारा बाहरी लोगों को काम पर लगाने से स्थानीय लोग नाराज हैं. स्थानीय लोगों ने कहा कि क्षेत्र में काम हो रहा है और क्षेत्र के लोगों को काम पर नहीं रखा गया है. सरकारी नियम के अनुसार बिजली कनेक्शन भी नहीं लिया गया है. घाट के अंदर तक मुरूम डालकर रास्ता बना दिया गया है. ट्रैक्टर चलने के बावजूद सड़क पर पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है. नियम के विरुद्ध बालू खनन किया जा रहा है.

बेनागाड़िया गांव के पास से भारी मात्रा में बालू जब्त तस्कर ले न भागें, इसलिए पुलिस ने मिला दी मिट्टी

गुड़ाबांदा .

गुड़ाबांदा प्रखंड क्षेत्र में सफेद बालू का अवैध कारोबार एनजीटी की रोक के बावजूद जारी है. इसी क्रम में बुधवार देर शाम माइनिंग इंस्पेक्टर अरविंद उरांव ने गुप्त सूचना के आधार पर गुड़ाबांदा प्रखंड के बेनागाड़िया गांव स्थित नहर के समीप छापेमारी कर भारी मात्रा में अवैध रूप से डंप किए गए बालू को जब्त किया. इसके बाद जब्त बालू की निगरानी की जिम्मेदारी गुड़ाबांदा थाना को सौंपी गयी. प्रशासन को आशंका थी कि बालू माफिया रात के अंधेरे में जब्त बालू को दोबारा उठा सकते हैं. इसे देखते हुए पुलिस और खनन विभाग ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए जेसीबी मशीन की मदद से डंप किए गए बालू को मिट्टी में मिला दिया, ताकि उसका दोबारा उपयोग या अवैध परिवहन नहीं किया जा सके.

पहले भी गायब हो चुका है जब्त बालू :

स्थानीय सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में पूर्व में जब्त किए गए बालू के भंडार धीरे-धीरे गायब हो गए थे. इसी अनुभव को देखते हुए इस बार प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए मौके पर ही बालू को मिट्टी में मिला दिया. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन और बालू के अवैध भंडारण के खिलाफ आगे भी अभियान जारी रहेगा तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी.

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लेखक के बारे में

Author: ATUL PATHAK

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