East Singhbhum News : असम में आदिवासी पर अत्याचार निंदनीय, मौन क्यों हैं विपक्षी नेता
अंग्रेजी शासन काल के दौरान झारखंड से गये आदिवासी समुदाय आज भी असम में उत्पीड़न का शिकार हो रहे
By ATUL PATHAK | Updated at :
घाटशिला.
घाटशिला विधायक सोमेश चंद्र सोरेन ने शनिवार को फूलडूंगरी स्थित झामुमो कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर असम में झारखंड से गये आदिवासी एवं संताल समुदाय पर हो रहे अत्याचार को गंभीर और निंदनीय बताया. उन्होंने इस मुद्दे पर झारखंड के विरोधी दलों विशेषकर भाजपा के आदिवासी नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाये. कहा कि अंग्रेजी शासन काल के दौरान झारखंड से गये आदिवासी समुदाय आज भी असम में उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं.
आदिवासियों पर अत्याचार पर चुप्पी क्यों?:
विधायक ने सवाल किया कि जब झारखंड या झारखंड से बाहर असम और बिहार में आदिवासी समुदाय पर संकट आता है, तब हर बार झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ही आगे आना पड़ता है. कहा कि बीते 19 जनवरी को असम में रह रहे झारखंड से गये आदिवासी एवं संताल समुदाय और बोडो समुदाय के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद 20 जनवरी को सैकड़ों आदिवासी व संताल परिवारों के घर जला दिये गये. इससे पहले भी असम में वर्ष 1996, 2006 और 2014 में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं. वहीं बिहार के पूर्णिया में आदिवासी घर जलाये जाने की घटना के समय भी भाजपा के आदिवासी नेता मौन थे.
आदिवासी-संताल समुदाय पर अत्याचार निंदनीय:
विधायक ने कहा कि उस समय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर सांसद विजय हांसदा एवं मंत्री रामदास सोरेन घटना स्थल पर पहुंचे थे और पीड़ितों से मिलकर पूरे मामले की जानकारी ली थी. उन्होंने असम की ताजा घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप कर स्थायी समाधान निकालना चाहिए, मौके पर जगदीश भकत, कालीपद गोराई, सुराई बास्के, सोनाराम सोरेन, प्रफुल्ल हांसदा, बाबूलाल मुर्मू, सुशील मार्डी समेत अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे.