मुसाबनी.
यूसिल की बागजाता माइंस में काम करने वाले ठेका मजदूर कंपनी की जटिल टेंडर प्रक्रिया के कारण रोजगार से वंचित हैं. टेंडर खत्म होने के कारण वर्तमान में मिसलेनियस ग्रुप के 65 मजदूर 6 मार्च 2026 से, डिकलाइन के 70 मजदूर 20 फरवरी 2026 से तथा रेज ग्रुप के 33 मजदूर 22 अप्रैल 2026 से बेरोजगार बैठे हैं. टेंडर प्रक्रिया में हो रहे विलंब के कारण ठेका मजदूरों के परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गये हैं. बागजाता माइंस में करीब 500 मजदूर काम करते हैं. इसमें से करीब 65% ठेका मजदूर हैं. माइंस में उत्पादन रख रखाव एवं विकास का काम ठेका मजदूरों की जिम्मे ही है. ठेका मजदूरों का टेंडर समाप्त होने के कारण जहां मजदूर बेरोजगार हो गये हैं वहीं इसका असर माइंस के उत्पादन पर भी पड़ रहा है. माइंस में मैन पावर की कमी के कारण माइंस की उत्पादन क्षमता लगभग आधी हो गयी है.माइंस संचालन में ठेका मजदूरों की अहम भूमिका
2006 में शुरू हुई बागजाता माइंस की स्थापित उत्पादन क्षमता 500 टन प्रतिदिन है. माइंस के संचालन में ठेका मजदूरों की भूमिका अहम हैं. पर सबसे अधिक परेशानी ठेका मजदूरों को ही झेलनी पड़ती है. टेंडर समाप्त हो जाने के कारण लगभग आधे ठेका मजदूरों का रोजगार समाप्त हो गया है. इससे माइंस के उत्पादन पर असर पड़ रहा है.
टेंडर कर रोजगार का आश्वासन दे रहा प्रबंधन
रोजगार से वंचित ठेका मजदूरों के अनुसार प्रबंधन अब तक जल्द टेंडर प्रक्रिया पूरा कर रोजगार देने का आश्वासन ही दे रहा है. मजदूर आश्वासन के सहारे जी रहे हैं. रोजगार चले जाने से कई ठेका मजदूर उधारी लेकर परिवार चला रहे हैं वहीं कई ठेका मजदूरों ने अपने पीएफ की जमा पूंजी की निकासी कर ली है.अब कंपनी स्वयं टेंडर करती है. जानकारी के अनुसार पहले टेंडर मेकॉन करती थी. मेकॉन की टेंडर प्रक्रिया जल्द हो जाती थी, लेकिन अब कंपनी स्वयं टेंडर की प्रक्रिया करती है. कंपनी की टेंडर प्रक्रिया काफी जटिल है. टेंडर की फाइल कई टेबुल से होकर गुजरती है. इसमें विलंब होता है. एक साल के टेंडर के लिए कभी-कभी 6 से 8 माह प्रक्रिया को पूरा करने में ही गुजर जाता है. इसका खामियाजा ठेका मजदूर एवं उनके परिवारों को झेलना पड़ता है.
बागजाता माहुलडीह माइंस को आटसोर्सिंग से संचालित करने की योजना पर हो रहा काम
यूसिल अल्पकालिक टेंडर प्रक्रिया को समाप्त कर बागजाता एवं माहुलडीह माइंस को आउटसोर्सिंग के तहत संचालित करने के लिए योजना बना रही है. क्योंकि बागजाता माइंस में ठेका मजदूरों की संख्या अधिक है. ऐसे में आउटसोर्सिंग द्वारा माइंस को संचालित करने से सहूलियत होगी. इसके तहत 5 से 7 वर्ष वाले टेंडर प्रक्रिया को एक साल के अंदर शुरू की योजना है. यदि आउटसोर्सिंग के तहत माइंस का संचालन होगा तो बागजाता के ठेका मजदूरों के अल्पकाल के टेंडर प्रक्रिया के कारण रोजगार की समस्या के समाधान की उम्मीद है. इसका लाभ माइंस के ठेका मजदूर एवं उसके परिवारों को मिलेगा वहीं माइंस में उत्पादन भी लक्ष्य के अनुरूप हो पायेगा.
