धालभूमगढ़.
धालभूमगढ़ के पानीजिया गांव निवासी मधुसूदन गोप (50) की 29 जनवरी को सिलिकोसिस की बीमारी से मौत हो गयी. वे पिछले चार वर्षों तक रेमिंग मास इंडस्ट्रीज में कार्यरत थे. ओशाज इंडिया के महासचिव समित कार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि कारखाने में काम करते हुए मधुसूदन गोप को धीरे-धीरे सीने में तेज दर्द और सांस लेने में कठिनाई होती थी. चिकित्सीय जांच के बाद उनके सिलिकोसिस से पीड़ित होने की पुष्टि हुई. बीमारी के कारण वे काम करने में पूरी तरह असमर्थ हो गये, जिससे परिवार को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा. मृतक अपने पीछे पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गया है. शोकग्रस्त परिवार और उनकी पत्नी ने सवाल उठाते हुए कहा कि कब तक गरीब, भौतिक और सामाजिक रूप से कमजोर रहने वाले मजदूर सिलिकोसिस जैसी जानलेवा बीमारी से असमय मौत का शिकार बनेंगे. न सरकार हमारी सुध ले रही है, न हमें मुआवजा मिल रहा है.धालभूमगढ़ और चाकुलिया में अबतक 51 की मौत
समित कार ने कहा कि स्थानीय आंकड़ों के अनुसार, धालभूमगढ़ में 229 और चाकुलिया में 117 सिलिकोसिस मरीज हैं. इनमें से अब तक 51 पीड़ितों की मौत हो चुकी है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाती है. समित कार ने जानकारी दी कि मधुसूदन गोप लंबे समय से सिलिकोसिस से पीड़ित थे. यह बीमारी क्षेत्र में लगातार मजदूरों की जान ले रही है. उन्होंने सरकार से सिलिकोसिस को गंभीर पेशागत बीमारी मानते हुए पीड़ितों और मृतक परिवारों को उचित मुआवजा व इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की.
