डुमरिया : पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड की केंदुआ पंचायत स्थित जंगल ब्लॉक गांव अंतर्गत गम्हिराकोचा टोला में शनिवार को पारंपरिक आषाढ़ी पूजा हुई. मुख्य पुजारी हरिपद सरदार व सहायक पुजारी बलराम सरदार ने अनुष्ठान संपन्न कराया. क्षेत्र में अच्छी वर्षा, सुख-शांति, समृद्धि व जन कल्याण की कामना को लेकर हर साल पूजा होती है. मुख्य पुजारी ने कहा कि आषाढ़ी पूजा प्रकृति के प्रति समर्पण, श्रद्धा, लगाव तथा मानव और प्रकृति के समन्वय का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि प्रकृति ही समस्त जीव-जगत का पालन-पोषण करने वाली सर्वशक्तिमान शक्ति और सभी जीवों का मूल आधार है. प्रकृति के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है. हमारी संस्कृति का मूल संदेश यही है कि आस्तिक या नास्तिक से ऊपर वास्तविक शक्ति प्रकृति ही है. इसका सम्मान, संरक्षण और संवर्धन ही हमारे जीवन तथा पर्यावरणीय संतुलन का मुख्य आधार है. इस अवसर पर नाया हरिपद सरदार, कुड़ाम देवरी पूरे सरदार, बलराम सरदार, ग्राम प्रधान उमापद सरदार, पूरे सरदार, नेत्रा सरदार, निवारण सरदार, वृंदावन सरदार, बीर सिंह देवगम सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित थे.
मानव और प्रकृति के समन्वय का प्रतीक है आषाढ़ी पूजा
डुमरिया के गम्हिराकोचा में पारंपरिक आषाढ़ी पूजा संपन्न हुई। ग्रामीणों ने अच्छी वर्षा, सुख-समृद्धि और प्रकृति के संरक्षण के लिए विशेष प्रार्थना की।

11जी 11- आषाढ़ी पूजा के लिए पहाड़ पर जुटे ग्रामीण | Prabhat Khabar Network