सरकारी स्कूलों में हो ओलचिकि की पढ़ाई

बहरागोड़ा : विधायक कुणाल षाड़ंगी ने 14 मार्च को विधानसभा में मुख्यमंत्री प्रश्नकाल में सरकारी स्कूलों में ओलचिकि पढ़ाई शुरू करने और शिक्षिक नियुक्ति का मामला उठाया. विधायक ने कहा कि 2013 में ओलचिकि को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जा चुका है. आज तक राज्य के सरकारी विद्यालयों में संताली भाषा (ओलचिकी) […]

बहरागोड़ा : विधायक कुणाल षाड़ंगी ने 14 मार्च को विधानसभा में मुख्यमंत्री प्रश्नकाल में सरकारी स्कूलों में ओलचिकि पढ़ाई शुरू करने और शिक्षिक नियुक्ति का मामला उठाया. विधायक ने कहा कि 2013 में ओलचिकि को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जा चुका है. आज तक राज्य के सरकारी विद्यालयों में संताली भाषा (ओलचिकी) की पढ़ाई शुरू नहीं हुई है. ओलचिकि लिपि के शिक्षकों की नियुक्ति भी नहीं हुई है.

सरकार इस मसले पर निर्णय ले और ओलचिकि लिपि के शिक्षकों की नियुक्ति करे. इसके बाद विद्यालयों में पढ़ाई शुरू करवाये. एनसीआरटी पुस्तकों का अनुवाद कराया जाये. रांची दूरदर्शन से प्रतिदिन समाचार प्रकाशन और सांस्कृतिक कार्यक्रम हो, रेलवे स्टेशनों में उदघोषणा और स्टेशनों का नाम सुनिश्चत करवाया जाये. मुख्यमंत्री ने जवाब दिया कि इन सुझावों को सरकार स्वीकृत करती है. ओलचिकी लिपि को पूरा सम्मान दिया जायेगा और उक्त सभी सुझावों पर सरकार अमल करेगी. विधायक ने शून्य काल में तांती (ततवा) को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग की, ताकि इस जाति के लोगों को सरकारी लाभ
मिल सके.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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