सरकारी राजस्व का लगा रहे हैं चूना
बहरागोड़ा : बहरागोड़ा में बायपास से वाहनों को पार कराने वाला गिरोह हर रात में दर्जनों वाहनों को पार करा कर सरकार को हजारों का चूना लगाता है. एक संगठित गिरोह का यह खेल महीनोें से जारी है. इस गिरोह ने एनएच 33 पर तांडव मचा रखा है. पहली बार पुलिस ने इस खेल का भंडाफोड़ किया है.
मोटल चौक पर लगता है जमावड़ा. रात के 12 बजे जब पुलिस का गश्ती जीप थाना चली जाती है तब यह गिरोह एनएच 33 पर सक्रिय हो जाता है. गिरोह के लोग मोटल चौक पर जुटते हैं और बंगाल तथा ओड़िशा से आने वाले माल वाहक वाहनों को रोेकते हैं. 30-40 वाहनों की लाइन लगती है तब गिरोह के लोग वाहनों बाइ पास सड़क से पार कराने लगते हैं. गिरोह के लोग बाइक या फिर किसी चार चक्का वाहन से इन वाहनों के पीछे-पीछे चलते हैं. ताकि कोई रोके, तो हंगामा किया जा सके.यह खेल सुबह तक चलता है.
ऐसे पार होते हैं वाहन. बहरागोड़ा के वन विभाग विश्रामागार के पास वाणिज्य कर विभाग का चेकपोस्ट है. मोटल चौक से एक पक्की सड़क गंधानाटा जाती है. इस सड़क से ही वाहनों को पार कराया जाता है. इस सड़क पर रांगामाटिया होते हुए बुढ़ीपुुखुर जाने पर एक कच्ची सड़क बायें मुड़ जाती है. यह कच्ची सड़क करकेट्टा होते हुए महेशपुर चौक पर एनएच 33 से मिल जाती है. इस सड़क से वाहनों को ले जाने से चालक चेकपोस्ट पर राजस्व देने से बच जाते हैं. गिरोह इसी सड़क से वाहनों को पार कराता है.
प्रति वाहन लिये जाते हैं 800 से 1200 रुपये. बाइ पास से वाहनों को पार कराने के लिए यह गिरोह प्रति वाहन 800 से 1200 रुपये तक वसूलता है.
इसका भुगतान करने से वाहन चालकों को दो से तीन हजार तक फायदा होता है. हर रात में 30 से 40 वाहन पार कराये जाते हैं. इस तरह हर रात सरकार को एक से डेढ़ लाख तक चूना लगता है.कई बार टला है टकराव. रात में बाइ पास से वाहनों को पार कराने के इस खेल में अपना आधिपत्य कायम करने को लेकर दो गुटों में कई बार टकराव टला है. पिछले दिनों इस सड़क पर जमकर बवाल हुआ था. कई वाहनो के शीशे तोड़े गये थे. घटना की जांच अनुमंडलाधिकारी संतोष कुमार गर्ग ने किया था. उन्होंने पुलिस को आवश्यक दिशा निर्देश दिया था.
चेकपोस्ट प्रशासन भेज चुका है त्रामिहाम संदेश. वाहनों को बाइ पास से पार कराने के मसले पर चेकपोस्ट प्रशासन ने कई बार वाणिज्य कर विभाग के वरीय अधिकारियों को त्राहिमाम संदेश भेज कर इस पर रोक लगाने की मांग की. अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान भी यह ममला गंभीरिता से उठाया गया. परंतु इस रोक लगाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई.
