मानुषमुरिया उवि: न चहारदीवारी, न शौचालय, न पेयजल

बहरागोड़ा : देश में आज हर जगह महिला सुरक्षा और शौचालय की खूब चर्चा हो रही है. शौचालय निर्माण के लिए योजना चलायी जा रही है. बेटी देंगे उस घर में, शौचालय होगा जिस घर में का नारा लग रहा है. प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक शौचालय का बखान कर रहे हैं. मगर कैसी विडंबना […]

बहरागोड़ा : देश में आज हर जगह महिला सुरक्षा और शौचालय की खूब चर्चा हो रही है. शौचालय निर्माण के लिए योजना चलायी जा रही है. बेटी देंगे उस घर में, शौचालय होगा जिस घर में का नारा लग रहा है. प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक शौचालय का बखान कर रहे हैं. मगर कैसी विडंबना है कि बहरागोड़ा प्रखंड स्थित मानुषमुरिया हाई स्कूल की, जिसकी न तो चहारदीवारी है, न तो शौचालय है और न है पेयजल की उचित व्यवस्था. अपने गर्भ में गौरवमय इतिहास छिपाये यह स्कूल आज सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रहा है. अपनी चमक खो रहा है. इतना ही नहीं सिर्फ दो शिक्षकों के भरोसे यह स्कूल चल रहा है.

1949 में यहां के समाजसेवी अरविंद भोल द्वारा स्थापित यह विद्यालय कभी क्षेत्र का गौरव हुआ करता था. ग्रामीण इलाके के बच्चों को शिक्षित करने में अहम भूमिका अदा करता था. आज स्थिति यह है कि कक्षा नौ और दस के 363 छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए सिर्फ तीन ही शिक्षक हैं. चहारदीवारी के अभाव में विद्यालय भवन रात में चोर-उच्चकों का अड्डा बन जाता है.
सबसे विडंबना है कि स्कूल में शौचालय नहीं है. छात्राओं के लिए गंभीर समस्या है. स्कूल का एक मात्र चापानल से पीने लायक पानी नहीं निकलता है. छात्र-छात्राओं की साइकिल रखने के लिए बना साइकिल स्टैंड कई साल से ध्वस्त पड़ा है. छात्र-छात्राओं को धूप और गर्मी में खुले आसमान के नीचे अपनी साइकिलों को रखना पड़ता है,विगत 11 फरवरी को संपन्न स्कूल के वार्षिकोत्सव समारोह में प्रभारी प्रधानाध्यापक छोटा भुजंग टुडू ने स्कूल की समस्याओं पर प्रकाश डाला व दुख जताया. विधायक कुणाल षाड़ंगी ने आश्वस्त किया कि एक माह के अंदर साइकिल स्टैंड बनवा देंगे.
लाखों का मॉडल भवन बेकार. स्कूल परिसर में कई साल पूर्व बना लाखों का मॉडल स्कूल भवन दर्शन की वस्तु बना है. यह आलीशान भवन महत्वहीन साबित हो रहा है, परंतु एक शौचालय बनाने की दिशा में आज तक पहल नहीं हुई.

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