मुसाबनी : मुसाबनी के बदिया गांव में डायरिया पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ रही है. ऐसे में ग्रामीणों का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था व एमजीएम अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था से विश्वास उठ गया है. 21वीं सदी के तकनीकी युग में ग्रामीणों ने मंगलवार को डायरिया से मुक्ति के लिए ओझा, झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र व पूजा-पाठ का सहारा लिया. आज भी ग्रामीण अंधविश्वास के मकड़जाल में फंसे हुए हैं. मंगलवार को टोला में एक ओझा दिन भर पूजा करवाता रहा. महिलाओं ने उपवास रख कर पूजा की. टोकरी, हंडी व झाड़ू में डायरिया को भरकर टोला से बाहर फेंक दिया. टोला की सीमा की घेराबंदी की, ताकि डायरिया टोला में प्रवेश न कर सके.
सरकारी चिकित्सा से उठा ग्रामीणों का विश्वास डायरिया से मुक्ति के लिए झाड़-फूंक का सहारा
मुसाबनी : मुसाबनी के बदिया गांव में डायरिया पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ रही है. ऐसे में ग्रामीणों का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था व एमजीएम अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था से विश्वास उठ गया है. 21वीं सदी के तकनीकी युग में ग्रामीणों ने मंगलवार को डायरिया से मुक्ति के लिए ओझा, झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र व पूजा-पाठ का सहारा […]

जानकारी के मुताबिक ग्रामीणों ने 27 अगस्त की रात को डुमरिया से एक ओझा को बुलाकर लाया. मंगलवार की सुबह से पूजा शुरू हुई. डायरिया भगाने के लिए तंत्र-मंत्र का सहारा लिया. महिलाओं ने उपवास रखा. घर के आगे गोबर से लिपाई की गयी. पूजा हुई. विभिन्न चौक और चौराहों पर पूजा की गयी. इसके बाद घर से हंडी, टोकरी व झाड़ू को निकाला. सामूहिक रूप से गांव के बाहर फेंक दिया. वहां से आ गये. गांव वालों का मानना है कि पूजा के बाद टोला में डायरिया प्रवेश नहीं करेगी. पूजा कर टोला की सीमा की घेराबंदी कर दी गयी है.
देवता नाराज हो गये हैं, इसलिए डायरिया फैला : ग्रामीण
ग्रामीणों ने कहा कि देवता नाराज हो गये हैं, इसलिए डायरिया फैली है. वहीं ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सरकारी चिकित्सा व्यवस्था फेल है. एमजीएम में स्थिति बदहाल है. टोला में चिकित्सक कैंप कर रहे हैं. दवा दे रहे हैं. शाम होते ही चले जाते हैं. रात में परेशानी होती है. देखने वाला कोई नहीं है. मुसाबनी सीएचसी की प्रभारी पी टोपनो ने कहा कि डायरिया के प्रति स्वास्थ्य विभाग सजग है. चिकित्सकों की टीम कैंप रही है. वे खुद भी दो दिन वहां गयी थी. आज भी दो चिकित्सक भेजे गये हैं.
मुसाबनी के शिव मंदिर टोला में चार दिनों से डायरिया का कहर
डायरिया से मुक्ति के लिए डुमरिया से ओझा को बुलाया गया
दिनभर होती रही पूजा महिलाओं ने रखा उपवास
टोकरी, झाड़ू व हंडी में डायरिया को भरकर गांव के बाहर फेंका, सीमा की घेराबंदी की