घाटशिला : यूसिल की नरवा पहाड़ माइंस कॉलोनी स्थित अतिथिगृह (गेस्ट हाउस) के रखरखाव, मरम्मत व संचालन में फर्जीवाड़ा कर ठेकेदार कंपनी को हर माह करीब 40 हजार रुपये का चूना लगा रहा है. जानकारी के अनुसार हर माह तीन ऐसे कर्मचारी के नाम पर मस्टर रोल व पेमेंट शीट तैयार हो रहा है, जो गेस्ट हाउस में काम ही नहीं करते हैं. इनमें मनीष गर्ग, बरुण कुमार सिंह और भुंद्रा शर्मा शामिल हैं. आश्चर्यजनक है कि इस फर्जीवाड़ा की शिकायत वरीय अधिकारियों से करने वाले अधिकारी पीके नायक को राज्य के बाहर लांबापुर प्रोजेक्ट में ट्रांसफर कर दिया गया. वहीं मामले की लीपापोती की तैयारी की जा रही है.
यूसिल : तीन फर्जी कर्मियों के नाम पर हर माह हो रहा भुगतान
घाटशिला : यूसिल की नरवा पहाड़ माइंस कॉलोनी स्थित अतिथिगृह (गेस्ट हाउस) के रखरखाव, मरम्मत व संचालन में फर्जीवाड़ा कर ठेकेदार कंपनी को हर माह करीब 40 हजार रुपये का चूना लगा रहा है. जानकारी के अनुसार हर माह तीन ऐसे कर्मचारी के नाम पर मस्टर रोल व पेमेंट शीट तैयार हो रहा है, जो […]

25 जुलाई को मामले का हुआ उजागर
जानकारी के अनुसार इस मामले को बीते 25 जुलाई 2018 को अपर प्रबंधक कार्मिक ने उजागर किया. यूसिल नरवा पहाड़ माइंस के अपर प्रबंधक (कार्मिक) ने यूसिल प्रबंधन, अतिथिगृह (गेस्ट हाउस) के संबंधित अधिकारी व विस्थापित समिति के साथ बैठक कर उक्त मामले को रखा था. जानकारी के
अनुसार इस मामले में संबंधित अधिकारियों ने स्वीकार किया. यूसिल नरवा के अपर प्रबंधक (कार्मिक) ने ई-मेल से यूसिल के उच्च पदाधिकारियों को मामले की जानकारी दी. इसका नतीजा अपर प्रबंधक कार्मिक को भुगतना पड़ रहा है. इस मामले की जांच होने पर कई पदाधिकारियों की परेशानी बढ़ सकती है.
हर माह 40 हजार रुपये का चूना लगा रहा ठेकेदार
ठेकेदार के अंदर 16 कर्मचारी, भुगतान हो रहा 19 को
गेस्ट हाउस के रखरखाव, संचालन व मरम्मत करते हैं कर्मचारी
मामले को उजागर करने वाले अधिकारी का हुआ ट्रांसफर
मामले की लीपापोती में लगे हैं पदाधिकारी
19 कर्मचारियों के नाम पर हर माह हो रहा भुगतान
सूत्रों के अनुसार ठेकेदार के अधीन 16 कर्मचारी काम करते हैं, जबकि हर माह 19 कर्मचारियों के नाम पर भुगतान किया जा रहा है. इनका मस्टर रोल व पेमेंट शीट संपदा कार्यालय नरवापहाड़ में बनायी जाती है. इसे संबंधित अधिकारी से प्रमाणित कर कार्मिक विभाग को भेजे जाने का प्रावधान है. इसके तहत यूसिल के लेखा विभाग को भुगतान के लिए अग्रसारित किया जाता है. वहीं मजदूरों को ठेकेदार व बैंक के माध्यम से खाते में राशि भेजी जाती है.