तीन प्रखंडों के 2146 आदिम परिवारों को दो माह से नहीं मिला अनाज

घाटशिला : टशिला, मुसाबनी और डुमरिया प्रखंड के आदिम जनजाति सबर और बिरहोरों को दो माह से मुख्यमंत्री डाकिया योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. चावल का पैकेट तैयार नहीं होने के कारण परेशानी हुई है. तीनों प्रखंडों में आदिम जनजाति के 2146 परिवार हैं. अनाज नहीं मिलने से सबर और बिरहोरों के समक्ष […]

घाटशिला : टशिला, मुसाबनी और डुमरिया प्रखंड के आदिम जनजाति सबर और बिरहोरों को दो माह से मुख्यमंत्री डाकिया योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. चावल का पैकेट तैयार नहीं होने के कारण परेशानी हुई है. तीनों प्रखंडों में आदिम जनजाति के 2146 परिवार हैं. अनाज नहीं मिलने से सबर और बिरहोरों के समक्ष भुखमरी की स्थिति है. इसे लेकर मंगलवार को घाटशिला प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी संतोष कुमार से प्रखंड के जेएसएलपीएस के प्रबंधक विजय वर्मा ने भेंट की.

पैकेट बनाने वालों को पांच माह से मजदूरी नहीं : एमओ ने जेएसएलपीएस के प्रबंधक को बताया कि अप्रैल से अगस्त तक जगन्नाथपुर महिला ग्राम संगठन की महिला समूहों ने डाकिया योजना के चावल का पैकेट तैयार किया. महिला समूह की सदस्यों को पांच माह से मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है. इस कारण महिला समूह पैकेट नहीं बना रही हैं. एमओ ने बताया कि जो त्रुटि है. उसमें सुधार करें, ताकि राशि का भुगतान हो सके. भुगतान शीघ्र करा देंगे. जेएसएलपीएस के प्रबंधक ने कहा कि 11 अक्तूबर सै पैकेट बनाने का कार्य शुरू होगा.
2056 परिवारों को नहीं मिल रहा अनाज का पैकेट : प्रखंड आपूर्ति की देखरेख कर रही तुलसी मुर्मू ने बताया कि प्रतिमाह 2056 परिवारों के लिए चावल का पैकेट तैयार किया जाता था. जगन्नाथपुर महिला समूह की 20 से 22 महिलाएं पैकेट तैयार करती थीं. प्रति पैकेट 12 रुपये के हिसाब से लगभग 94 हजार रुपये की मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है. घाटशिला प्रखंड में 487, मुसाबनी में 467 और डुमरिया प्रखंड में 635 पैकेट बनाया जाता है. महिला समूह से बात कर 11 अक्तूबर से पैकेट बनाने के लिए बात करेंगी. तीनों प्रखंडों के एमओ ने महिला समूह को मजदूरी दिलाने का भरोसा दिलाया है.
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