नेपाल में फंसे दुमका के मजदूरों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से लगायी गुहार, कहा- जल्द घर वापस लाये सरकार

नेपाल में फंसे दुमका जिला के भारतीय मजदूरों ने वीडियो के द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मदद मांगी है. मजदूरों का कहना है कि अगर किसी तरह का पास भी वह उपलब्ध करा दें या झारखंड सरकार नेपाल सरकार से बात कर लें, तो यहां से वे अपने गांव सुरक्षित लौट सकते हैं.

By Prabhat Khabar Print Desk | May 20, 2020 6:34 PM

दुमका : नेपाल में फंसे दुमका जिला के भारतीय मजदूरों ने वीडियो के द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मदद मांगी है. मजदूरों का कहना है कि अगर किसी तरह का पास भी वह उपलब्ध करा दें या झारखंड सरकार नेपाल सरकार से बात कर लें, तो यहां से वे अपने गांव सुरक्षित लौट सकते हैं. जिस कंपनी में वे काम कर रहे हैं, उसके बड़े अधिकारी गाड़ी से झारखंड पहुंचाने को तैयार हैं. ये सभी मजदूर नेपाल में हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में बिजली टावर लगाने का काम कर रहे थे. इन मजदूरों ने पहले भी एक बार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से गुहार लगायी थी. तब जब उनकी नहीं सुनी गयी, तो इन मजदूरों ने पैदल ही वहां से निकल जाने का निश्चय किया था, लेकिन पुलिस और वहां के प्रशासन ने तब जाने नहीं दिया.

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नेपाल के सिंधुपाल चॉक के शोहले में फंसे हैं ये मजदूर

काम करने के लिए दुमका के 50 मजदूरों का दल नेपाल गया था. ये सभी मजदूर दुमका जिला अंतर्गत रामगढ़ प्रखंड की सिमरा पंचायत के कांजो, पहाड़पुर पंचायत के धोबियाटिकर तथा जरमुंडी प्रखंड के खरबिला, रायकिनारी के रांगाबांध व बनवारा पंचायत के नाथामारसा के रहने वाले हैं. ये सभी लोग झारखंड वापस आने के लिए वहां के नगरपालिका से भी संपर्क साध चुके हैं, लेकिन इन्हें अनुमति नहीं मिल रही. मजदूरों का कहना है कि झारखंड सरकार वापस लाने का इंतजाम नहीं कर सकती, तो पास ही उपलब्ध करा दे, संवेदक कंपनी उन्हें भेज देगी.

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प्रशासन ने नहीं दी जाने की इजाजत, वापस भेजा

मजदूरों ने विडियो में अपना दु:ख- दर्द जाहिर करते हुए कहा यहां उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इलाके में कोरोना संक्रमितों का मामला आ गया है, इससे भी वे लोग घबराये हुए हैं. एक कमरे में सभी 50 मजदूरों को गुजर- बसर करना पड़ रहा है. एक बार इन मजदूरों ने वहां से निकलने की सोची, तो वहां के लोगों ने उनपर पत्थर बरसाये. हम जान बचा कर किसी तरह से निकले, पर हम पर ही कोरोना फैलाने का आरोप लगाया जाने लगा. लिहाजा प्रशासन ने उन्हें वापस उसी कमरे में भेज दिया गया.

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