बच्चों व महिलाओं के हक के लिए सड़कों पर उतरे ग्रामीण

गुमरो पंचायत अंतर्गत पहाड़पुर गांव में आज भी एक भी आंगनबाड़ी केंद्र नहीं होने के कारण छोटे बच्चे पोषाहार और प्रारंभिक शिक्षा से वंचित हैं.

दलाही. दशकों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित पहाड़पुर गांव में अब सब्र का बांध टूटने लगा है. गुमरो पंचायत अंतर्गत पहाड़पुर गांव में आज भी एक भी आंगनबाड़ी केंद्र नहीं होने के कारण छोटे बच्चे पोषाहार और प्रारंभिक शिक्षा से वंचित हैं, जबकि गर्भवती और धात्री महिलाओं को टीकाकरण व जांच के लिए मीलों दूर भटकना पड़ रहा है. इसी उपेक्षा के खिलाफ बुधवार को ग्रामीणों ने एकजुट होकर आंगनबाड़ी केंद्र की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. ग्रामीण सहदेब हेम्ब्रम, पूर्व मुखिया सूरज हांसदा, सगरी देवी, नीता मुनि हेम्ब्रम, फूलमनी हांसदा एवं चांदमुनी सोरेन ने बताया कि वर्तमान में गोलबाजार आंगनबाड़ी केंद्र की दूरी करीब चार किलोमीटर है. पहाड़ी और दुर्गम रास्तों से होकर वहां पहुंचना छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद जोखिम भरा है. ग्रामीणों ने पहाड़पुर गांव में अलग से आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत करने की मांग की. स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार जहां एक ओर डिजिटल इंडिया और पढ़ेगा इंडिया जैसे नारे दे रही है. वहीं पहाड़पुर के मासूम बच्चे कुपोषण की मार झेलने को मजबूर हैं. आंगनबाड़ी केंद्र के अभाव में न तो बच्चों को नियमित पौष्टिक आहार मिल पा रहा है और न ही उनका स्कूल-पूर्व शिक्षण शुरू हो पा रहा है, जिससे उनके भविष्य पर सीधा असर पड़ रहा है. क्षेत्र की महिलाओं ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच और बच्चों के टीकाकरण के लिए उन्हें दूसरे पंचायत में स्थित गोलबाजार जाना पड़ता है. पहाड़ी रास्ते, परिवहन की कमी और लंबी दूरी के कारण कई बार पैदल जाना पड़ता है, जिससे हमेशा जान का खतरा बना रहता है. ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब पहाड़पुर में आंगनबाड़ी केंद्र खोलने की मांग की है, ताकि बच्चों को पोषण, शिक्षा और महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाएं समय पर मिल सकें.

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Published by: Binay kumar

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