पानी के संकट से जूझ रहे ग्रामीण, जंगल और पहाड़ पर टिकीं उम्मीदें

नामोडीह पहाड़िया टोला के लगभग 30 परिवार पिछले तीन वर्षों से जलमीनार के खराब होने के कारण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। 2022 में सोलर संचालित जलमीनार बनी थी, जो करीब ढाई साल पहले खराब हो गई और आज तक मरम्मत नहीं हुई। ग्रामीण मजबूरन पहाड़ पर चढ़कर दो किलोमीटर दूर से पानी लाते हैं, जिससे समय और मेहनत अधिक लगती है, घर का कामकाज व पशुपालन प्रभावित हो रहे हैं। पंचायत से लेकर जिला प्रशासन तक शिकायतें करने के बाद भी कोई समाधान नहीं मिला। इस समस्या से खेती-बाड़ी भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन की अनदेखी पर गहरा रोष व्यक्त किया है।

नामोडीह पहाड़िया टोला में तीन वर्षों से जलमीनार बंद प्रतिनिधि, गोपीकांदर. आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय आज भी गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहा है. गोपीकांदर प्रखंड के नामोडीह पहाड़िया टोला में लगभग 30 परिवारों को पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं है. ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2022 में कल्याण विभाग द्वारा सोलर संचालित जलमीनार का निर्माण कराया गया था, लेकिन यह पिछले तीन वर्षों से खराब पड़ा है. इसकी मरम्मत के लिए अब तक कोई पहल नहीं हुई. मजबूरी में ग्रामीणों को नुकीले पत्थरों वाले पहाड़ पर चढ़कर लगभग दो किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत से लेकर जिला कार्यालय तक कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई. मंजू रानी ने बताया कि पहाड़ और जंगल के रास्ते से ढलान चढ़-उतर कर कुएं से पानी लाना पड़ता है. सिर पर घड़ा लेकर चलना कठिन होता है और दिन का अधिकांश समय इसी में निकल जाता है. इससे घर के कामकाज प्रभावित होते हैं और पशुपालन भी संभव नहीं हो पाता. गर्मी के मौसम में यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है. देवेन्द्र देहरी ने बताया कि करीब ढाई वर्ष पहले जलमीनार की मोटर खराब हो गई थी और तभी से यह बंद है. मरम्मत के लिए बीडीओ और उपायुक्त कार्यालय में आवेदन दिया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. पानी की समस्या से खेती-बाड़ी भी प्रभावित हो रही है. इस मुद्दे को लेकर पानवती रानी, सोनामुनी महारानी, लालमुनी महारानी, आशा महारानी, काजल महारानी, लक्ष्मी महारानी, चिनतामुनी महारानी, सोनी महारानी, मंजू कुमारी, भुगेन गृही, देवेन्द्र देहरी, देवनारायण पुजहर, बाबूलाल देहरी, रतिया देहरी, शैलेश देहरी, संजय देहरी, शंकर देहरी सहित अन्य ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन के प्रति गहरा रोष व्यक्त किया है.

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Published by: Anand jaswal

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