काठीकुंड. साहिबगंज-गोविंदपुर मुख्य सड़क का निर्माण क्षेत्रीय लोगों के लिए बेहतर परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम माना गया, लेकिन निर्माण कार्य के दौरान काठीकुंड गांधी चौक पर वर्षों पूर्व मौजूद यात्री विश्राम शेड को ध्वस्त कर दिया गया. दुखद पहलू यह है कि अब तक उस शेड का पुनर्निर्माण नहीं किया जा सका है. न जिला प्रशासन ने इस दिशा में कोई कदम उठाया और न ही जनप्रतिनिधियों ने इसे गंभीरता से लिया. काठीकुंड प्रखंड के कोने-कोने से आने वाले यात्री इसी चौक से कोलकाता, रांची, जमशेदपुर, देवघर, साहिबगंज, पाकुड़, मालदा सहित लंबी दूरी की बसें पकड़ते हैं. पहले जहां शेड में बैठकर यात्री आराम से अपनी बस का इंतजार करते थे, अब उन्हें धूप, बारिश या ठंड की परवाह किए बिना सड़क किनारे ही खड़े रहना पड़ता है. यात्रियों की सुविधा के लिए जरूरी यह ढांचा अब केवल एक स्मृति बनकर रह गया है. चौक पर यात्रियों के बैठने की सुविधा के साथ-साथ पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है. एक अदद स्थायी प्याऊं तक नहीं जिस से यात्रा करने वाले कमजोर तबके के लोगों को निःशुल्क पानी मिल सके. यात्रियों को या तो पैसे देकर पानी खरीदना पड़ता है या पास की दुकानों में जाकर पानी पीना पड़ता है. गर्मी के मौसम में यह स्थिति और भी गंभीर हो जाती है. खासकर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे इस अव्यवस्था से अधिक प्रभावित हो रहे हैं. गांधी चौक पर शाम होते ही अधिकांश दुकानें बंद हो जाती हैं, जिससे रात के समय यहां बसों का इंतजार कर रहे यात्रियों के लिए और भी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है. उनके पास न बैठने की जगह होती है और न ही किसी प्रकार की सुरक्षा या सुविधा. वर्तमान में इस चौक से होकर भारी मालवाहक और कोयला लदे सैकड़ों वाहन गुजरते हैं, जिससे सड़क किनारे खड़े यात्रियों की जान को भी खतरा बना रहता है. सड़क जाम की स्थिति में यात्रियों को घंटों सड़क किनारे खड़े रहना पड़ता है. ऐसे में एक सुरक्षित और सुविधायुक्त यात्री विश्राम शेड अत्यंत जरूरी है. प्रखंडवासियों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि वे जल्द से जल्द काठीकुंड गांधी चौक एवं चांदनी चौक पर यात्री विश्राम शेड का निर्माण कराएं, जिससे यात्रियों को राहत मिल सके और वे सुरक्षित ढंग से अपने गंतव्य तक पहुंच सकें. पेयजल की भी समुचित व्यवस्था करते हुए कुछ स्थानी मशीनरी प्याऊं लगाये जाने वाहिए जिससे बस स्टैंड्स पर आम जनता की प्यास बुझ सके. यह सिर्फ एक शेड की मांग नहीं, बल्कि एक जरूरी सार्वजनिक सुविधा की पुनः स्थापना की गुहार है, जिससे सैकड़ों लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है.
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