मिट्टी के दीयों की होने लगी डिमांड

दीपावली पर मिट्टी के दीयों का महत्व खास माना जाता है. लोग अपने घरों की साफ-सफाई करने में व्यस्त हैं.

दुमका नगर. उपराजधानी दुमका में दीपों का त्योहार दीपावली को लेकर लोगों में उत्साह का माहौल छाया हुआ है. लोग इसकी तैयारी में जुट चुके हैं. लोग अपने घरों की साफ-सफाई करने में व्यस्त हैं. चारों ओर उत्साह का वातावरण छाया हुआ है और लोग दीपावली के आने का इंतजार कर रहे हैं. दीपावली के दिन लोग अपने घरों को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाते हैं और भगवान गणेश-लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हैं. साथ ही मिट्टी के दीये भी जलाते हैं. पिछले काफी समय से लगातार हो रही बारिश ने दीये और मिट्टी के खिलौने बनाने वाले कुम्हारों के चेहरे पर मायूसी छा गयी थी. उन्हें यह भय सता रहा था कि अगर दीपावली के समय में बारिश होने लगी तो उन्हें काफी नुकसान हो सकता है. लेकिन कड़ी धूप निकलने के बाद उनके चेहरे पर खुशी है और वे लगातार मिट्टी के दीये और खिलौने बनाने में व्यस्त दिखे. मिट्टी के दीयों की बढ़ने लगी डिमांड : आज के आधुनिक युग में जहां इलेक्ट्राॅनिक लाइटें और दीयों की डिमांड होने लगी है. वहीं दूसरी ओर मिट्टी के बने दीयों की भी डिमांड पहले की अपेक्षा अब और ज्यादा बढ़ गयी है. लोग दीयों और खिलौनों की खरीदारी करते हैं. साथ ही कुम्हार पहले की अपेक्षा में और ज्यादा दीये बनाने में लग गए. राखाबनी के रहने वाले कुम्हार रामधनी पंडित ने बताया कि पहले की अपेक्षा इस वर्ष दीयों की डिमांड में वृद्धि हुई है. मिट्टी के दीयों को माना जाता है शुभ : दीपावली के अवसर पर मिट्टी से बने हुए दीयों को ही शुभ माना जाता है. कुम्हार चाक के माध्यम से मिट्टी के दीये और खिलौने तैयार करते हैं. इन दीयों का इस्तेमाल पूजा-पाठ और अन्य अनुष्ठानों में किया जाता है. दीपावली के दिन लोग इसी दीये से अपने घरों को सजाते हैं और मंदिरों में भी जाकर दीयों को जलाते हैं.

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Author: BINAY KUMAR

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