दुमका. झारखंड राज्य किसान सभा व आदिवासी अधिकार मंच, भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र के संयुक्त आह्वान पर सोमवार को आयुक्त कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया गया. इसके माध्यम से किसानों, मजदूरों एवं रैयतों से जुड़ी 11 सूत्री मांगों को उठाया गया. इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने बंदोबस्त कार्यालय में रैयतों की समस्याओं के समाधान के लिए कार्रवाई करने का अनुरोध किया. धरना में प्रमुख मांगों में अनाज की एमएसपी को कानूनी गारंटी के साथ खरीदी, किसानों का संपूर्ण कर्ज माफी, विकसित भारत बीजीआरजी कानून वापस लेकर मनरेगा को पुनर्बहाल करना, बीज कानून 2025, बिजली कानून 2025, चार श्रम संहिता (लेबर कोड) को वापस लेने की मांग शामिल रही. इसके अलावा जीएसटी कानून में संशोधन कर राज्यों को टैक्स लगाने का अधिकार लौटाने, संताल परगना सर्वे एवं सेटलमेंट 1872 की धारा 25(3)(4) के तहत हड़पी गयी जमीन वास्तविक रैयतों के वंशजों को सौंपने, शिविर न्यायालय के आदेश की प्रति 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने, फाइनल सर्वे पर्चा में साबिक जमाबंदी दर्ज करने तथा संताल परगना में छह माह के भीतर सर्वे कार्य पूर्ण कराने की मांग की गयी. धरना को संबोधित करते मुख्य वक्ता सुरजीत सिन्हा ने कहा कि 19 जनवरी को देशभर में मजदूर-किसान एकता दिवस मनाया जाता है. उन्होंने 1985 में तमिलनाडु में 11 मजदूरों की शहादत का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार की नीतियां मजदूरों और किसानों के खिलाफ हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजीआरजी कानून के माध्यम से मनरेगा को समाप्त करने की साजिश की जा रही है, जिससे मजदूरों को कोई लाभ नहीं मिलेगा. वहीं किसान सभा के संयुक्त सचिव एहतेशाम अहमद ने संताल परगना में बढ़ते प्रदूषण, विस्थापन और बंदोबस्त कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि तरमीम, नकल और सर्च के नाम पर अवैध वसूली आम बात हो गयी है. उन्होंने चेतावनी दी कि मार्च में बंदोबस्त कार्यालय के समक्ष तीन दिवसीय डेरा डालो–घेरा डालो आंदोलन किया जायेगा. धरना को गुपिन सोरेन, सीटू के लखन लाल मंडल, शरीफुल इस्लाम, सुभाष हेंब्रम, गंगाधर यादव, हुडिग सोरेन, देवी सिंह पहाड़िया, अखिलेश झा, लुखी सोरेन, रघुवीर मंडल, पीटर हेंब्रम ने भी संबोधित किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता असगर आलम ने की.
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